– जिनवर्षों में रिक्तियां नहीं निकाली गई, उतने वर्ष की अभ्यर्थियों को उम्रसीमा में छूट प्रदान की गई
– टैट की अवधि बढाना और कम करना सरकार की शक्तियों में शामिल है। कई राज्यों में सरकारों ने इस अवधि को बढाया है तो कई जगह कम भी किया है।
– प्रतियोगी परीक्षा या अकादमिक अंकों के आधार पर भर्ती कराना भी सरकार की शक्ति के दायरे को इंगित करता है, जबकि प्रदेश सरकार ने ऐसे नियमों में कोई परिवर्तन करना लाजिमी नहीं समझा।
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इन राज्यों ने टेट की अवधि में किया परिवर्तन
बहरहाल बिहार ने टेट की अवधि बढाकर सात साल की है। राजस्थान में 2011 व 2012 टेट की अवधि सात साल रही। वहीं बाद में भाजपा के सत्ता में आने के बाद टेट का नाम बदलकर रीट कर दिया और अवधि तीन साल कर दी। लेकिन इस परीक्षा को भर्ती का सत्तर फीसदी आधार बनाया।






