साइट-बी औद्योगिक क्षेत्र में लगी भीषण आग से उद्योग जगत में आक्रोश
मथुरा। देवेन्द्र गोस्वामी

यूपीसीडा औद्योगिक क्षेत्र साइट-बी स्थित प्लॉट संख्या K-78 एवं K-79 पर संचालित एन.के. पॉलिमर उद्योग में आज एक भीषण अग्निकांड की घटना घटित हो गई, जिससे उद्योग में रखा भारी मात्रा में कच्चा माल (Raw Material) जलकर राख हो गया तथा उद्यमी को लाखों रुपये की आर्थिक क्षति उठानी पड़ी।
प्रत्यक्षदर्शियों एवं प्रारंभिक जानकारी के अनुसार घटना का मुख्य कारण सड़क किनारे से गुजर रही 11,000 वोल्ट की विद्युत लाइन के तारों का आपस में टकराना रहा। तारों के टकराव से निकली चिंगारियां नीचे सड़क पटरी पर उगी सूखी एवं ज्वलनशील झाड़ियों तथा जंगलनुमा घास पर गिरीं, जिससे आग लग गई। देखते ही देखते यह आग विकराल रूप धारण कर उद्योग परिसर तक पहुंच गई और वहां रखे कच्चे माल को अपनी चपेट में ले लिया।
घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र के उद्यमियों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया। रिफाइनरी इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन के अध्यक्ष Mohit Agrawal ने इस घटना को यूपीसीडा की घोर लापरवाही का परिणाम बताते हुए कहा कि यूपीसीडा द्वारा प्रत्येक वर्ष औद्योगिक क्षेत्र के रखरखाव (Annual Maintenance) हेतु ठेका दिया जाता है, जिसके अंतर्गत सड़क पटरी पर उगी झाड़ियों एवं जंगल की सफाई, सड़कों की नियमित सफाई, सड़क किनारे लगाए गए पौधों की सिंचाई, नालियों की सफाई तथा औद्योगिक क्षेत्र के सामान्य रखरखाव की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है।
उन्होंने कहा कि रिफाइनरी इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन द्वारा समय-समय पर संबंधित अधिकारियों को लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत कराया जाता रहा है कि औद्योगिक क्षेत्र में सड़क किनारे उगी सूखी घास एवं झाड़ियों की सफाई नहीं की जा रही है, किन्तु इसके बावजूद न तो ठेकेदार के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई की गई और न ही सफाई कार्य सुनिश्चित कराया गया। परिणामस्वरूप आज एक उद्यमी को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।
श्री अग्रवाल ने कहा कि यदि समय रहते सड़क पटरी पर उगे जंगल एवं सूखी घास की सफाई करा दी गई होती तो यह आग इतनी भयावह नहीं बनती। यह घटना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि रखरखाव कार्यों में की जा रही अनदेखी और लापरवाही अब उद्यमियों की जान-माल की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि यह ईश्वर की कृपा रही कि इस अग्निकांड में किसी भी कर्मचारी, श्रमिक अथवा अन्य व्यक्ति की जान नहीं गई और कोई जनहानि नहीं हुई। यदि आग कुछ और देर तक फैलती या किसी कार्यशील इकाई तक पहुंच जाती तो स्थिति अत्यंत भयावह हो सकती थी।
रिफाइनरी इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन ने इस घटना की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने, दोषी अधिकारियों एवं संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने तथा प्रभावित उद्यमी को हुई आर्थिक क्षति का उचित मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है।
एसोसिएशन ने प्रश्न उठाया है कि जब उद्यमी समय पर सभी देयकों का भुगतान करते हैं और रखरखाव के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, तब ऐसी लापरवाही से हुए नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा? यदि भविष्य में ऐसी घटनाओं में जनहानि होती है तो उसका उत्तरदायी कौन होगा?
रिफाइनरी इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि औद्योगिक क्षेत्र में सफाई, रखरखाव एवं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो उद्यमियों को अपने हितों की रक्षा के लिए व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होना पड़ेगा।






