– अन्याय के शिकार टेट अभ्यर्थियों ने लखनऊ और दिल्ली में किया था आन्दोलन
– सरकार ने उनके बहाए पसीने पर नहीं खाया जरा भी तरस
भरत लाल गोयल

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भ्रष्टाचार की भेंट चढी टेट-2011 के अभ्यर्थियों को इस सरकार से भी उम्मीदें रूखसत हो गई हैं। उनकी उम्मीदें जगीं थी कि भाजपा राज में उनको ज्यादा नही ंतो न्याय मिलते हुए परीक्षा में बैठने की अनुमति मिल सकती है, लेकिन वर्तमान में सरकार ने उनकी अपेक्षाओं पर कुठाराघात किया है।
टेट-2011 में जिस स्तर पर व्यापक धंाधली हुई थी, यह किसी से छुपा नहीं है। बोर्ड की मिलीभगत से अयोग्य अभ्यर्थी नौकरी पा गए। योग्य अभ्यर्थी आज भी मौके का इंतजार कर रहे हैं। सपा बसपा से उम्मीद छोड चुके ऐसे अभ्यर्थियों को भाजपा सरकार से आस जगी थी कि अब प्रतिभा का सम्मान होगा, अभ्यर्थियों का कहना है कि कमोवेश यह सरकार भी नौकरियों के मामले में आज तक कोई परिवर्तन नहीं कर पाई। वही पुराना ढर्रा अभी भी चल रहा हैं। टेट-2011 के पास अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार चाहती तो टेट की अवधि बढाकर उनको इस परीक्षा में बैठने का मौका दे सकती थी। अभ्यर्थियों का कहना है कि 2011 के बाद बीएड व टेटधारकों को मौका आज तक नहीं मिला है। सरकारों द्वारा कोई रिक्तियां नहीं निकाली गई थीं। इस बार बीएड धारकों को प्राइमरी टेट में बैठने की अनुमति मिली है। उनका यह भी कहना है कि तमाम अभ्यर्थी 2011 के बाद ओवरएज हो गए हैं। सरकार को उन पर विचार करना चाहिए था।






