फरह। कई पंचायतां में उपर्युक्त स्थानों पर डस्टबिन नहीं लगाए गए हैं। निजी चबूतरों पर उनको लगाया गया है। विवाद के कारण अन्य लोग उनमें अपने घरों का कचरा डालने से बच रहे हैं। लेकिन ग्रामीणों में इस बात को लेकर चर्चा भी है कि यदि उनमें कचरा डाला भी गया तो उसके भरने पर कचरे को कौन साफ करेगा।

इसकी व्यवस्था पंचायत के पास भी नहीं है। चूंकि गांवों में सफाई कर्मी आज भी निजी तौर पर काम कर रहे हैं। वे प्रत्येक घर का कचरा उठाने के एवज में रोटी लेते हैं या अनाज






