DHAM NEWS-राष्ट्रीय कवि सम्मेलन रात भर झूमे श्रोतागण, कविताओं के माध्यम से अटल जी को दी गयी सच्ची श्रद्धांजलि

 फरह। दीनदयाल महोत्सव के दूसरे दिन देर रात्रि तक हुए राष्ट्रीय कवि सम्मेलन मैं दूरदराज से आए कवियों ने अपनी कविताओं से दर्शकों को ताली बजाने पर मजबूर कर दिया। सभी कवियों ने अटल जी की याद में ओर देशप्रेम पर में काव्यपाठ किया। मैनपुरी से आए कवि सतीश समर्थ ने कहा काकर समर्पण वतन के लिए यह ”नेह का कर समर्पण वतन के लिए, गेह का कर समर्पण वतन के लिए, है समर्पण बिना व्यर्थ यह जिंदगी देह का कर समर्पण वतन के लिए” आगरा के कवि सचिन दीक्षित ने कहा कि ”मैंने बहुत सम्मान किया है बापू वाली सीखो का लेकिन फिर भी कर्जदार हूं भगत सिंह की चीखो का” सोनीपत से पधारे डॉ अशोक बत्रा ने कहा ”बिन हिरनी के जंगल सुना हिरणी जैसा दौड़े कौन प्रभु के बाघों के आगे अपनी हिरनी छोड़े कौन” कासगंज के कवि निर्मल सक्सैना ने स्वर्गीय अटल जी की याद में अपने काव्य पाठ में कहा ”कमल तुम ने खिलाया था वह चमन याद करता है, कारगिल पर विजय ली थी वह वतन याद करता है, विश्व भर में अटल जी आपने जो मान दिलवाया, उसी शक्ति परीक्षण को पोखरण याद करता है

आगरा की भूमिका जैन ने भी स्वर्गीय अटल जी की याद में कहा कि ”मधुर इन गीतों की फुलझड़ियां टूट गई सत्य शौर्य साहस की कड़ियां टूट गई अटल आपके यू जाने से भारत मां के शीश मुकुट की कंचन मणियां टूट गई” लखनऊ के योगेश चौहान ने अपने काव्य पाठ में कहा ” यदि पटेल भारत माता की छाती पर जिंदा होता तो देशद्रोहियों के गर्दन में फांसी का फंदा होता।” इस बार के कवि सम्मेलन को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धा श्री अटल बिहारी वाजपेई को समर्पित किया गया कार्यक्रम के प्रायोजक जगदीश पाठक एवं जगमोहन पाठक रहे विशिष्ट अतिथि के रूप में संघ के पदाधिकारी ख्याली राम जी और दिनेश जी ने शिरकत की और मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह जी मौजूद रहे

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