फरह। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहनसिंह ने किसानों को जैविक खेती के गुण बताये। अपने सम्बोधन में उन्होने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों के लिये अनेकों योजनायें संचालित की है। जैविक खेती के लिये किसानों को खाद एवं बीजों को सम्मेलन में निःशुल्क कराने की बात कही उन्होंने कहा कि देश में जैविक खेती से जो पैदावार होगी वो अच्छे दामों में बाजार में बेची जा सकेगी जिससे किसानों की आय दुगनी हो जायेगी।

हमारी सरकार प्रयासरत है किसान भाई जो भी पैदावचार करेंगे उनकी फसल का अच्छा मूल्य बाजार में मिल सके। जैविक खेती से जो फसल तैयार होती है चाहे गेहूं, बाजरा, धान जो भी हो वो हमारे स्वास्थ्य के लिये भी लाभदायक होती है। एक ही कार्य से किसानों की आय दुगनी और देशवासियों का स्वास्थ्य लाभ हो रहा है। मथुरा जनपद में इसके लिये मृदा परीक्षण के लिये केन्द्र स्थापित किये गये हैं। जहां पर किसान भाई अपनी मिट्टी की जांच करा सकते हैं। इसके साथ ही खेती की मिट्टी को उर्वरक बनाने हेतु किसान केचुआ पालन केन्द्र भी खोल सकते हैं इसके लिये 12 हजार रुपये किसानों को सरकार
द्वारा मदद की जा रही है। पं0 दीनदयाल का किसानों के लिये जो चिन्तन था उसको साकार करने के लिये
यहां सभी उपस्थित है। पं0 जी का विचार था धन का अभाव और प्रभाव दोनों ही हानिकारक है गरीब कमजोर को आगे बढाने के लिये प्रभावशाली लोगों को आगे आना चाहिये और अभाव ग्रस्त लोगों को भी इनका सहयोग लेने के लिये आगे आना चाहिये।

जैविक कृषि सम्मेलन में निदेशक राजेन्द्र प्रसाद, जीएलए विश्वविद्यालय के कुलपति डा.0 दुर्ग सिंह चौहान, वेटनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केएलएम पाठक, विधायक पूरन प्रकाश, ठा0 कारिन्दासिंह, अध्यक्ष अशोक टैंटीवाल, महामंत्री डा. कमल कौशिक, अजय पोइया, महीपालसिंह, दीवानसिंह तरकर, नरेन्द्रसिंह, जगमोहन पाठक,राकेश चौहन ठा0, के के तरकर आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन व संयोजन पायल सिंह चौहान ने किया।






