नाम पर बटटा लगा रहीं फरह में दीनदयाल की संस्थाएं

– कालेज में टीचर्स नहीं, अस्पताल में डाक्टर
– जनता को राहत मिले तो कैसे, सरकार के दावे खोखले नजर आ रहे यहां
भरत लाल गोयल, चीफ एडीटर पीडीयू समाचार
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मथुरा। फरह के दीनदयाल को उनके नाम की ही संस्थाएं लजा रही हैं। जनता को उनका मुकम्मल लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि सरकार का करोडों का बजट आम लोगों को लग रहा है कि इनके नाम पर सम्भवत व्यर्थ ही बह रहा है। मानना यह भी है कि सरकार को उनके भौतिक और गुणात्मक सुबिधाओं को ओर ध्यान देना चाहिए।


पं दीन दयाल की नगरी फरह में उनके नाम से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बना हुआ है। सन 1992 में जब प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याणसिहं थे, उन्होने इसकी नींव रखी। उसी समय अस्पताल से सटे पं दीनदयाल राजकीय कन्या इंटरकालेज की भी स्थापना हुई। 25 साल के समयान्तराल में ये संस्थाएं बदहाली के कगार पर जा पहुंची हैं। कहीं डाक्टर नहीं है तो कहीं टीचर्स। हाल तो यह देखिए कि बिना पर्याप्त डाक्टरों के सीएची को एफआरयू बना डाला। यही नहीं आदर्श सीएचसी की संज्ञा से बिभूषित कर दिया। दूसरी ओर जीजीआईसी में दसबी और बारहवी में पढाने के लिए टीचर्स नहीं है। पूरा कालेज सात टीचर्स के भरोसे चल रहा है। इनमें भी कहीं टीचर्स आए दिन मीटिंग आदि में व्यस्त रहती हैं। इतने पर भी कालेज में इसी साल से इंटर में गणित की मान्यता तो दे ही दी है, जबकि गणित का कोई टीचर मौजूद नहीं है वरन कक्षा छह से आठवी तक की भी मान्यता भी आंख बंद कर दे दी है। अब यहां की छात्राओं को माकूल शिक्षण कैसे मिल पाता होगा, यह समझ से परे है। यही नहीं सुबिधाओं के नाम पर देखिए अस्पताल में भी पीने के पानी का अभाव है। अस्पताल प्रशासन खुद टैंकरों से पानी की आपूर्ति कराता है। जबकि कालेज में भी टैंकरों से पानी मंगाना पडता है।
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इन डाक्टरों की है कमी
सीएचसी फरह में वर्तमान में बालरोग, हडडीरोग, रेडियो लॉजिस्ट, सर्जन, फिजीशियन, नेत्ररोग, नाक कान गला बिशेषज्ञ डाक्टरों की कमी है।


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इन टीचर्स की है कमी
जीजीआईसी फरह में तृतीय श्रेणी कोई अध्यापक ही नहीं है। एलटीग्रेड में भी पांच टीचर्स हैं। जब कि आठ टीचर्स होने चाहिए। इंटर बिषयों को पढाने के लिए मात्र दो ही अध्यापिकाएं हैं। जबकि आठ लेक्चर्स होने चाहिए। यानी बीस टीचर्स के स्टाफ के सापेक्ष कालेज में वर्तमान में सात टीचर्स के भरोसे कालेज चल रहा है।


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वर्जन
डाक्टर्स की कमी नहीं थी अस्पताल में स्थानानतरण के बाद पद खाली हो गए। कोई अन्य डाक्टर यहां आया नहीं । सूचना उच्च अधिकारियों को प्रेषित की गई है। शासनस्तर से डाक्टरों की कमी है। स्थानीय स्तर पर इस संबंध में ज्यादा क्या हो सकता है।
डा रामवीर सिंह, केन्द्राधीक्षक सीएचसी फरह

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