न सरकार सरकी, न धाम की धडकन का सुर मिला

– पं दीनदयाल की जयन्ती पर अपना अपना राग गा रहे
भरत लाल गोयल, चीफ एडीटर पीडीयू समाचार
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फरह। न सरकार ही सरकी है न धाम की धडकनों के सुर सरकार के साथ मिले हैं। नतीजन जयन्ती को लेकर ही हर बार अलग अलग दिवस निर्धारित हो जाते हैं, जो एकता की भावना को खंडित करते प्रतीत हो रहे हैं।
यूं भाजपा सरकार को संघ के इशारे पर चलना माना जाता रहा है। लेकिन दीनदयालधाम में संघ और सरकार दो अलग अलग विचार नजर आते हैं। ऐसा नहीं है कि यह अबकी बार हो रहा हो, जब से स्मारक समिति पं दीनदयाल उपाध्याय का स्मृति महोत्सव मनाती आ रही है, तभी से वैचारिक भिन्नता परिलक्षित प्रतीत हुई है। पिछली साल जब केन्द्र सरकार ने जन्म शताब्दी समारोह धाम की भूमि पर ही मनाया तो मेला समिति ने केन्द्र के जन्मशताब्दी समारोह दिवस को दिल से स्वीकार नहीं किया। वरन मेला पदाधिकारियों ने अपनीं बांसुरी सरकार से हटकर बजाई। पिछले साल मेला अक्टूबर में लगाया गया। इस बार केन्द्र सरकार ने 25 सितम्बर को पं दीनदयाल जी का स्मृति दिवस सादगी के साथ मनाया है। सरकारी कार्यालयों में भी उक्त दिवस को सदभावना के साथ दीनदयालजयन्ती के रूप में मनाया। इस दिन केन्द्र सरकार ने दिवस को यादगार बनाने के लिए आयुष्मान आरोग्य मिशन की शुरूआत की है।

लेकिन फिर स्मारक समिति पदाधिकारियों ने केन्द्र के मनाए स्मृति दिवस को कोई तवज्जो नहीं दी। स्मारक समिति के पदाधिकारियों की मानें तो वे कभी अग्रंजी महीने के हिसाब से पं दीनदयाल जन्म तिथि नहीं मनाते हैं। उनकी जयंती सदेव से हिन्दी कैलेण्डर के हिसाब से मनाई जाती रही है। अत हिन्दी तिथि हर बर्ष बदलते क्रम में पडती रही है। सरकार माने या न माने, वे निरन्तर हिन्दी ग्रेगरियन कैलेण्डर की तिथि के अनुसार जन्म दिवस मनाएंगे। मेला पदाधिकारियों का यह भी कहना है कि सरकार को भी हिन्दी तिथि के अनुसार पं दीनदयाल जी की जयन्ती मनानी चाहिए। जब उनसे कहा कि सरकार के अनुकूल चलने में उनको क्या परेशानी है तो उनका जबाव था कि समिति कोई नई परम्परा नहीं डालना चाह रही है।

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