विवादों के साए में तीन साल से फंसा जीजीआईसी का सुलभ शौचालय – 19 लाख की लागत से समाज कल्याण विभाग द्वारा हर जीजीआईसी में बनवाए गए थे

-निर्माण के समय से ही पैदा हो गया था मैटरियल को लेकर ठेकेदार और कालेजतंत्र में मनमुटाव
भरत लाल गोयल, चीफ एडीटर पीडीयू समाचार
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फरह। 19 लाख की लागत से कस्बा स्थित जीजीआईसी में बने 10 सुलभ शौचालय तीन साल से विवादों के घेरे में घिर गए हैं। इसके चलते आज तक निर्माण दायी संस्था उनको हैंडओवर नहीं कर पाई है और कालेजप्रबंध टेकओवर नहीं कर सका है।
चारसाल पूर्व सरकारी योजना के तहत प्रदेश के जीजीआईसी में दस दस शौचालयों का निर्माण कराया गया था। शुरूआत में ही घटिया निमार्ण को लेकर तत्कालीन प्रभारी प्रिंसीपल डा राखी गुप्ता ने शिकायत की थी। इस पर इसका निर्माण कार्य बीच में छोड दिया गया। सेटिंग गेटिंग कर छह माह बाद फिर ठेकेदार ने निर्माण शुरू करा दिया।

एक साल से ज्यादा समय में पूरा बनकर तैयार हुआ। इस बीच प्रिंसीपल डा राखी का स्थानान्तरण हो गया। कालेज का चार्ज सीनियर लेक्चरर नम्रता पर आ गया। तभी से कालेज प्रबंध और ठेकेदार के बीच सुलभ शौचालय के हैडओवर को लेकर तनातनी उत्पन्न हो गई है। विवाद के चलते तीन साल से आज तक ठेकेदार उनको हैडओवर नहीं कर पाया है। हालांकि ठेकेदार के साथ समाज कल्याण विभाग के अधिकारी भी इस जुगत में लगे हैं कि शौचालय जल्द से जल्द हैंडओवर हो जाए, लेकिन कालेज प्रबंध कमियों के चलते किसी कीमत से समझौता करने को तैयार नहीं है। बीते दिन भी ठेकेदार कालेज पहुंचा। उसने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से भी दूरभाष पर बातचीत इस मामले को लेकर की, लेकिन अधिकारियों ने भी हाथ खउे कर दिए। अंतत उसे उल्टे पांव लौटना पडा। दूसरी ओर कालेज प्रबंधन का कहना है कि शौचालयों का निर्माण लापरवाहीपूर्ण हुआ है। उनमें बहुत सारी कमियां हैं। उनको आज तक ठीक नहीं किया गया है।

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