टैट-2011ः अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

लखनऊ के मैदान में 30 हजार से ज्यादा युवक युवती धरने पर
भरत लाल गोयल, चीफ एडीटर पीडीयूसमाचार
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उप्र टैट-2011 को लेकर सरकार दबावों के बोझ से घिरती जा रही है। लेकिन स्पष्ट निर्णय न होने के कारण अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वे तेज धूप और बरसात में भी मैदान में डंटे हुए है। अन्दर ही अन्दर सरकार उनके अनशन से हिल गई है।
चुनाव की सुगबुगाहट के बीच टैट-2011 के पचास हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने अपने हक की लडाई के लिए वर्तमान के सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वे एक माह से सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे हैं। पुलिस की लाठियों का भी निशाना भी बन रहे हैं, लेकिन अपने उददेश्य से कदापि हटने को तैयार नहीं है। उनका दृढ संकल्प देख सरकार भी अन्दर से हिल गई है। शिक्षामंत्री डा दिनेश शर्मा के नेतृत्व में तीन सदस्यी हाईपावर कमेटी का भी गठन किया है, लेकिन कमेटी भी अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है। अभ्यर्थियों की मांग है कि उनका समायोजन किया जाए। वे नौकरी के लिए ओवरएज भी हो चुके हैं। ऐसे में सरकार के सामने यक्ष प्रश्न भी खडा हो गय है क्यों कि सरकार ने अध्यापक भर्ती नियमावली को भी बदल दिया है। अब प्राइमरीस्कूलों में भी अध्यापकों की भर्ती प्रतियोगी परीक्षा के द्वारा होगी। ऐसे में सरकार बीच का रास्ता निकालने के मूड में है, लेकिन अभ्यर्थियों के बढते दबाव से सरकार कोई सटीक फैसला नहीं ले सकी हैं। दूसरी ओर अभ्यर्थी टिवटर के माध्यम से भी सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं।


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सरकार ले सकती है ये फैसला
हाईपावर कमेटी के गठन के बाद हालांकि अभी तक अभ्यर्थियों के पक्ष में कोई फैसला नहीं आ सका है, किन्तु मुख्यमंत्री कई बार अभ्यर्थियों को यह संकेत दे चुके हैं कि जब भी फैसला आएगा तो उनके पक्ष में आएगा। अब इसमें सरकार देरी करने के भी मूड में नहीं है। क्यों कि दहलीज पर खडे अगले साल लोकसभा के चुनाव होने वाले हैं। कहीं चुनावों में नुकसान नहीं उठाना पडे, इस लिए सरकार कोई सकारात्म निर्णय ले सकती है। इसमें अभी होने जा रही 97 हजार अध्यापक भर्ती में इनको परीक्षा देने के लिए छूट दे सकती है। इसके अलावा उनके लिए बोनस अंक का भी थोडा बहुत प्राबधान करने की चर्चा है।

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