41 हजार अध्यापकों के पद भरने के भी आसार फ्लाप

– गलत नीतियों के जाल में खुद प्रदेश सरकार उलझी
– 68500 के सापेक्ष आधे भी अध्यापक नहीं मिल पाएंगे स्कूलों को
भरत लाल गोयल, चीफ एडीटर पीडीयू समाचार
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68500 पदों पर अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया में अधिकारियों द्वारा बरती गडबडियों और लापरवाही ने प्रदेश सरकार की किरकिरी करा दी है। प्रदेश सरकार खुद अपने जाल में उलझती नजर आ रही है। 2008 से ही बेसिक स्कूलों की अध्यापक भर्ती में गडबडियों का शिगूफा थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरकार भले ही किसी की हो। अभी मथुरा में जनपद में 12 हजार अध्यापक भर्तियों और इससे पूर्व भर्तियों के घोटाले की आंच ठंडी नहीं पडी थी कि वर्तमान में चल रही 68500 अध्यापक भर्ती में घोटाले का एक और जिन्न सामने आ गया है। इसमें बरती गई गडबडियों को लेकर अभ्यर्थी लखनउ में धरना प्रदर्शन पर बैठ गए हैं। सवाल यह है कि सरकार की पारदर्शी नीतियों और नौकरशाही पर नियंत्रण के अभाव में घोटाले दर घोटाले सामने आते जा रहे हैं। इससे योग्य अभ्यर्थियों को नुकसान उठाना पड रहा है। बहरहाल जो भी हो, इस परीक्षा में इस बार 41 हजार परीक्षार्थी ही पास हो सके थे। इनकी तीन दिन चली काउंसिंलिग भी पूर्ण हो गई। मथुरा जनपद को लगभग 597 अध्यापक मिले थे। इनमें से 470 की ही काउंसिलिंग हो सकी है। यानी 127 अभ्यर्थी काउंलिंग के अयोग्य हो गए हैं। उनको अध्यापक बनने का ही मौका नहीं मिल सकेगा। इस तरह प्रदेश स्तर पर देखें तो 30 हजार अध्यापक बमुश्किल प्रदेश को मिल पाएंगे।
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पात्रता की शर्ते नहीं कर रहे थे पूरी
कउंसिलिंग के लिए सरकार ने नियमावली तैयार की थी। जनपद में सौ से ज्यादा अभ्यर्थी वे काउंसिलिंग के अयोग्य हुए हैं, जो लगातार पांच बर्ष तक प्रदेश में रहने का सबूत नहीं दे सके। इसके अलावा तमाम सीबीएसई बोर्ड से परीक्षा पास थे, उनको भी काउंसिलिंग से रोका गया है। इसके अलावा अन्य कई कारण भी रहे हैं। बहरहाल तीन दिन की काउंसिंलिंग रविवार को पूर्ण हो गई।

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