न्यूज डेस्क। पीडीयू समाचार
——————————————
शासन के तमाम प्रयास के बाद भी मीट का अवैध कारोबार पुन चमकने लगा है। अब इस ओर न पुलिस का ध्यान है न आला अधिकारियों का।

भाजपा सरकार में मांस के अवैध धंधें पर शुरूआत में चाबुक चला था। ऐसे कारोबारियों को धंधा बंद करने की स्पष्ट चेतावनी दी गई थी। इस बीच लाइसेंस बनवाने को भी निर्देश दिए गए थे। लेकिन बिना लाइसेंस के ही दोबार इस धंधे को हवा मिलने लगी हैं। रिफाइनरी मेनगेट पर फिर मछलीमार्केट जीवित हो गई है। वहां हर समय मछली बिक्रता ही नहीं दर्जनों ग्राहक भी आपको मिल जाएंगे। जबकि वहां से सौ मीटर दूरी पर पुलिस थाना भी है। यहीं नहीं बिगबाजार पर हर समय पुलिस वैन खडी भी रहती है। इसके बाद भी निर्भीक तरीके से यह अवैध कारोबार अपनी गति पकडता जा रहा है। फरह कस्बे में भी यह धंधा जमकर किया जा रहा है। यदि आप कढेरपुरा और मोहल्ला व्यापारियन की ओर बढेंगे तो गलियों में आपको पिंजडे में बंद मुर्गे और मुर्गियां दिख जाएंगी साथ ही आपकी खिदमत में खडे होने वाले लडके अंतत आपके पास आकर पूछ भी लेंगे, साहब क्या लेंगे। मुर्गा या बकरा की मीट। सूत्रों की बात मानें तो रात में कस्बे में मीट के लिए भैंस या बडा जानवर रोज मौत के घाट उतारा जाता है। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत भी की गई है, लेकिन पुलिस इस ओर कदापि ध्यान नहीं देती है।






