राजस्थान लोकसेवा आयोग ने ज्यादा फीस को किया वापसराजस्थान लो

– हमारे यहां छह लाख की फीस को दबाकर बैठे
– राजस्थान लोकसेवा आयोग की भर्ती प्रक्रिया पर अभी भी अभ्यर्थियों को है भरोसा

भरत लाल गोयल, चीफ एडीटर पीडीयू समचार 
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इलाहाबाद।


राजस्थान कभी ईमानदारी के लिए ही नहीं शिक्षा के क्षेत्र में देश के लिए मिसाल है। इस क्षेत्र में उपलब्धि पर सरकार को अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले हैं। हमारे राज्य में एलटी ग्रेड और प्रवक्ताओं की भर्ती लोक सेवा आयोग के माध्यम से सालों से की जा रही है। भर्ती सिर्फ लिखित परीक्षा की मेरिट के आधार पर होती रही हैं। भर्ती प्रक्रिया में पारर्दिर्शता भी बरती जाती है। वहीं सरकार बदलने के बाद उप्र लोकसेवा आयोग में ऐसा कुछ नहीं दिख रहा है।
मथुरा के एक अभ्यर्थी ने राजस्थान लोकसेवा आयोग में प्रवक्ता भर्ती के लिए आवेदन किया। लेकिन तकनीकि औश्र इंटरनेट समस्या के कारण परीक्षा फीस वैरीफाइड नही हुई, उसने इस आशंका में नए सिरे से पुन फीस आनलाइन जमा कराई कि कहीं आवेदन निरस्त न हो जाए। एक आवेदन के लिए दो बार फीस आयोग में पहुंची तो आयोग ने एक बार की फीस को वापस खाते में लौटा दिया । वहीं दूसरी ओर उप्र में एलटीग्रेड में दिसम्बर 2016 में निकाली गई रिक्तियों के सापेक्ष छह लाख की फीस आज तक वापस नहीं हो सकी है। जब कि आवेदन आॅनलाइन मांगे गए थे। आॅनलाइन ही फीस जमा हुई थी। यही नहीं 2011 में निकाली गई प्राइमरी शिक्षा में 72 हजार शिक्षक भर्ती में सन 2012-13 में सपा शासन में मेरिट क्रम बदलते हुए पुन आवेदन मांगे गए थे, एक एक अभ्यर्थी ने बीस बीस हजार तक फीस जमा कराई थी। क्यों कि अभ्यर्थी से प्रत्येक जनपद में आवेदन करने के लिए पांच सौ रूपए फीस तय थी और वह इस तरह 75 जनपदों में भी वह आवेदन कर सकता था। कही मौका हाथ से न निकल जाए, तमाम अभ्यर्थियों ने तीस से चालीस जिलों में आवेदन किया था। उक्त फीस का भी आज तक अभ्यर्थियों को कोई हिसाब किताब नहीं किया। जबकि उक्त भर्ती प्रक्रिया 2011 की विज्ञप्ति के तहत टेट की मेरिट के आधार पर शुरू हुई।

 

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