– अनुभव प्रमाण बनाने को लेकर भटकना पड रहा

– अनुमोदन पत्र मांग रहे प्रभारी बीएसए, जबकि जनपद में किसी भी स्कूल ने नहीं लिया अनुमोदन
भरत लाल गोयल, चीफ एडीटर पीडीयू समाचार —————————————-
मथुरा। निजी स्कूलों के अध्यापक अनुभव प्रमाणपत्र के लिए भटक रहे हों और अधिकारी उनको नए नए नियमों का हवाला देकर टहला रहे हों तो हर किसी को अच्छा नहीं लगेगा।
दरअसल वर्तमान में प्रदेश में माध्यमिक स्कूलों में प्रधानाचार्यों की रिक्तियां आने वाली हैं। पडौसी राज्यों में भी हाईस्कूल प्रिंसीपल की रिक्तियां निकली हुई हैं। इनमें कम से कम पांच साल का अनुभव मांगा जाता है। अब अधिकारी सरकारी स्कूलों के अध्यापकों का अनुभव प्रमाणपत्र तो सहज बना देते हैं, लेकिन निजी स्कूलों को स्कूल नहीं मान रहे हैं। जबकि सरकारी और निजी बोर्ड की मान्यता के तहत ही संचालित हैं । निजी स्कूलों के अध्यापकों के अनुभव प्रमाणपत्रों पर प्रभारी बीएसए प्रतिहस्ताक्षर यह कह कर नहीं कर रहे हैं कि अनुमोदन पत्र लाओ। जबकि खंड शिक्षा अधिकारी प्रमाणित कर चुके हैं। अब अध्यापक अनुमोदनपत्र कहां से लेकर आएं। जब िकहाल यह है कि ख्ुाद अधिकारियों को भी मालुम है कि जनपद में किसी भी निजी स्कूल ने आज तक अनुमोदन नहीं कराया है। इसके बाद भी वे संचालित हैं। तब अध्यापक अनुभव प्रमाणपत्र के समय अनुमोदन कहां से आ गया। शासन को भी इस बावत शिकायत दर्ज कराई गई है।
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हाईकोर्ट की भी इस बावत है गाइड लाइन
इस संबंध में एक वाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने आदेशित किया है कि निजी स्कूलों के अध्यापकों को अनुभव प्रमाणपत्र बनवाने का अधिकार है। अधिकारी अनुभव प्रमाणपत्र पर प्रतिहस्ताक्षर करने से मना नहीं कर सकते। यदि स्कूल ने इस बावत लिखकर दिया है और नियुक्ति आदेश के साथ उपस्थिति पंजिका भी है तो। लेकिन इन अधिकारियों को कौन समझाए, कि किसी को आगे बढने के लिए प्रेरित करें बजाय ब्रेक लगाने के।






