जिनके कारण लोकसेवा आयोग को करना पडा बदलाव, उन्हीं के आवेदन लेने में लेटलतीफी

– उप्र लोक सेवा आयोग की कछुआ गति कार्य से एलटीग्रेड परीक्षा समय पर मुमकिन नहीं

– याचियों के अभी तक नहीं मांगे गए आवेदन

भरत लाल गोयल, चीफ एडीटर पीडीयू समाचार

—————————————–

इलाहाबाद। उप्र लोकसेवा आयोग की कछुआ कार्यप्रणाली पर बेराजगार अभ्यर्थी हतप्रभ हैं। एक महीने बाद भी आयो एलटीग्रेड भर्ती क्रम में याचियों के आवेदन नहीं मांग सका है। जिनके कारण आयोग को भर्ती प्रक्रिया विलम्बित करनी पडी, उनके आवेदन मांगने में विलम्ब किया जा रहा है। जबकि आयोग ने दूसरी बार परीक्षा की तिथि 24 जून घोषित भी कर दी है।

याची अभी अपने को अभ्यर्थी नहीं मान रहे हैं। इस लिए वे परीक्षा की तैयारियों में ठीक से नहीं जुटे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि आदेश को एक माह से ज्यादा हो गया है। उनके आवेदन अभी तक नही लिए गए हैं। ऐसे अभ्यर्थी इंटरनेट पर आंख लगाए बैठे हैं कि उनके आवेदन के लिए पोर्टल सम्भवत कब खुल जाए। अभ्यर्थियों का यह कहना है कि अभी तक उनकी अभ्यर्थना तय नहीं हो सकी है तब वे परीक्षा की तैयारी भी समय से नहीं कर पा रहे हैं। आयोग के पास आवेदन आफलाइन या आॅनलाइन लेने का बहाना है। गौरतलब हो , एलटीग्रेड अध्यापक भर्ती में आयोग के पास 16 अप्रेल तक साढे सात लाख आवेदन आ चुके हैं । याचियों को अवसर देने पर यह संख्या और बढेगी। बता दें कि लोकसेवा आयोग ने विभिन्न विषयों के एलटी ग्रेड वेतनक्रम में 10763 अध्यापकों की रिक्तियां निकाली थी। पहले 6 मई परीक्षा तिथि घोषित की गई थी।

——————————————

ये बने याची

– ऐसे अभ्यर्थी हाईकोर्ट गए , जिन्होने दिसम्बर 2016 में इन्ही पदो ंके लिए आवेदन किया था।

– हिन्दी और कला बिषय के ऐसे अभ्यर्थी भी कोर्ट पहुंचे, जब आयोग ने स्नातक में बिषय संबंधी शर्तें बदल दी थीं।

 

——————————————

ईमानदारीः

उधर आयोग ने  ज्यादा फीस को लौटाया, हमारे यहां  6 लाख की दबाकर बैठे

– राजस्थान लोकसेवा आयोग की भर्ती प्रक्रिया पर अभी भी अभ्यर्थियों को है भरोसा

– उप्र के लोकसेवा आयोग चल रहा पुराने ढर्रे पर

भरत लाल गोयल, चीफ एडीटर पीडीयू समचार चैनल

——————————————

इलाहाबाद।

जनसंख्या में छोटे से पडौसी राज्य राजस्थान शिक्षा के क्षेत्र में देशभर के लिए मिसाल बना हुआ है। शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धि पर सरकार को अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले हैं। हमारे राज्य में एलटी ग्रेड और प्रवक्ताओं की भर्ती लोक सेवा आयोग के माध्यम से सालों से की जा रही है। भर्ती सिर्फ लिखित परीक्षा की मेरिट के आधार पर  होती  रही हैं। भर्ती प्रक्रिया में पारर्दिर्शता भी बरती जाती है।  वहीं  सरकार बदलने के बाद उप्र लोकसेवा आयोग में ऐसा कुछ नहीं दिख रहा है।

मथुरा के एक अभ्यर्थी ने राजस्थान लोकसेवा आयोग में प्रवक्ता भर्ती के लिए आवेदन किया। लेकिन तकनीकि औश्र इंटरनेट समस्या के कारण परीक्षा फीस वैरीफाइड नही  हुई, उसने इस आशंका में नए सिरे से पुन फीस आनलाइन जमा कराई कि कहीं आवेदन निरस्त न हो जाए। एक आवेदन के लिए दो बार फीस आयोग में पहुंची तो आयोग ने एक बार की फीस को वापस खाते में लौटा दिया । वहीं दूसरी ओर उप्र में एलटीग्रेड में दिसम्बर 2016 में निकाली गई रिक्तियों के सापेक्ष छह लाख की फीस आज तक वापस नहीं हो सकी है। जब कि आवेदन आॅनलाइन मांगे गए थे। आॅनलाइन ही फीस जमा हुई थी। यही नहीं 2011 में निकाली गई प्राइमरी शिक्षा में 72 हजार शिक्षक भर्ती में सन 2012-13 में सपा शासन में मेरिट क्रम बदलते हुए पुन आवेदन मांगे गए थे, एक एक अभ्यर्थी ने बीस बीस हजार तक फीस जमा कराई थी। क्यों कि अभ्यर्थी से प्रत्येक जनपद में आवेदन करने के लिए पांच सौ रूपए फीस तय थी और वह इस तरह 75 जनपदों में भी  वह आवेदन कर सकता था। कही मौका हाथ से न निकल  जाए, तमाम अभ्यर्थियों ने तीस से चालीस जिलों में आवेदन किया था। उक्त फीस का भी आज तक अभ्यर्थियों को कोई हिसाब किताब नहीं किया। जबकि उक्त भर्ती प्रक्रिया 2011 की विज्ञप्ति के तहत टेट की मेरिट के आधार पर शुरू हुई।

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*