भालुओं के टूटे, इन्फेक्टिड दांतों की हो रही सर्जरी, रूट कैनाल

– देशभर से वाइल्ड लाइफ एसओएस ने 668 स्लोथ बीयर कराए मुक्त


– कलंदर के इशारे पर नाचते थे ये भालु, अब हुए अनफिट
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पीडीयू समाचार चैनल
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मथुरा/आगरा। दर्द से तडपते और गुर्राते भालू, भले वे बोलने में अक्षम हों, लेकिन उनकी पीडा को समझा जा सकता है। वाइल्ड लाइफ एसओएस इंटरनेशनल एनजीओ मथुरा आगरा बार्डर पर कीथमझील के समीप स्लोथ बीयर कन्जरवेशन हाउस भी वैलप्लान्ड तरीके से चला रही है। इसमें वर्तमान में 30 से ज्यादा भालु हैं।
ज्यादातर भालु दो साल से लेकर 12 वर्ष तक हैं। लेकिन अधिकांश दंातों की समस्या से पीडित हैं। एसओएस का वैटरिनरी अस्पताल उनकी पूर्णत केयर करने में लगा है। योग्य डेन्टिस्ट पीडित भालुओं की न केवल रूट कैनाल कर रहे हैं वरन जरूरत के हिसाब से दंत सर्जरी को भी अंजाम दे रहे हैं। एसओएस के वैटरिनरी अस्पताल की लैब में अनतर्राष्ट्रीय स्तर की सुबिधाए मयस्सर हैं। डिजीटल डेंटल एक्सरे से लेकर डेन्टर सूट,थर्मल इमेजिंग कैमरा और आपरेशन थियेटर आदि सब मौजूद है। यही नहीं अस्पताल के चिकित्सक नई नई रिसर्चस में भी संलग्न है। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे शोध कार्यों में भी चिकित्सकों की सहभागिता है। इसी का नतीजा है कि बेकार और पूर्णत अनफिट भालुओं के जीवन को इन डाक्टरांे ने बदल दिया है। अब यहां के भालु मस्ती के साथ जीवन जी रहे हैं। ज्यादातर भालुओं के दांतों संबंधी समस्या थी, यहां के कुशल चिकित्सकों ने स्टब्ड दांत, कैबिटीयुक्त दांत या उनके संक्रमण को भी समाप्त किया है। एसओएस के वैटरिनरी रिसर्च केन्द्र की डायरेक्टर डा अरूणाशाह ने बताया कि कलंदर अपने लाभ और भिक्षा के लिए भालुओं केा नचाते थे। वे गर्म लोहे की सरिया प्रवेश कराकर उनके दांतों को भी आधा तोड देते थे। इससे दांतों का संक्रमण उत्पन्न हो गया। वाइल्डलाइफ के सहसंस्थापक कार्तिक नारायण कहते है ं कि मनुष्यों की डेंटल सर्जरी और रूट कैनाल बिधि सभी ने सुनी होगी। लेकिन उनसे कहीं बेहतर यहां भालुओं को दांत संबंधी समस्याओं छुटकारा दिलाया जा रहा है।

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