एक एक स्कूल संचालक को दो से पाचं लाख तक कमीशन मिल रहा
– मनमर्जी प्रकाशनों की पुस्तकें बेच रहे स्कूलों और कालेजों में

भरत लाल गोयल, सीनियर एडीटर पीडीयू समाचार चैनल
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मथुरा। प्रदेश सरकार के लाख दावे और प्रयास के बाद भी स्कूलों और कालेजो ंमें पुस्तकों के नाम पर चल रहा खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। मोटी के फीस के बाद किताबों को भी स्कूलों में ही बेचकर अभिभावकों की जेब काटी जा रही है।
देहात में पांच फीसदी स्कूल ख्ुाद ही पुस्तकें अपने छात्रों को बेच रहे हैं। शेष पिचानवे प्रतिशत स्कूलों की निर्धारित दुकानों पर किताबें फिक्स हो जाती हैं। प्रकाशनों से इनका कोई सरोकार नहीं है। दुकानदार स्कूल संचालकों को खुलकर पचास से साठ फीसदी कमीशन प्रदान करते हैं। मथुरा के कई प्ले और नर्सरी ग्रुप के बडे ग्रुप खुद ही अपने स्तर से मोटे दामों में पुस्तकें बेचते हैं और अभिभावकों की जेब काटी जाती है। हालां कि प्रदेश सरकार ने कक्षा नवीं से 12 वी तक एनसीआरटी की पुस्तकें अनिवार्य कर दी हैं। सरकार का यह कदम स्वागतयोग्य रहा है, लेकिन जूनियर, प्राइमरी और प्ले व नर्सरी कक्षाओं के लिए सरकार के पास कोई विजन नहीं रहा है ताकि अभिभावकों ी कटती जेब को बचाया जा सके। हाल यह है कि माध्यमिक और इंटरालेजों की पढाई से ज्यादा महंगा शिक्षण प्ले और नर्सरी कक्षाओं का हो गया है। प्ले और नर्सरी ग्रुप का छात्र एक क्लास को बीस हजार की फीस व अन्य खर्चे में पूरी कर पा रहा है।






