मथुरा। भरत लाल गोयल, न्यूज एडीटर पीडयू समाचार
फरह में हाईवे पर बंदरों का मंगल और शनि हो रहा है। उनकी रोज दावत उड रही हैं। हाल यह है कि इनकी तादात दिनप्रतिदिन बढती जा रही है। वाहनों के लिए भी इनकी बढती तादात खतरा बन सकती है।
ब्ंादरों को प्रचाीनकाल से ही हनुमान का रूप माना जाता रहा है। इस लिए आस्थावान तमाम लोग हर मंगल व शनिवार को ही नहीं वरन हर रोज यहां बंदरो को दावत देते देखे जा सकते थे। खास बात यह है कि ये बंदर इतने शांत प्रकृति के हैं कि लोगों पर जरा भी हमला नहीं कर सकते।
हाईवे पर द्वापर रिसोर्ट के सामने वनविभाग का लगभग छह एकड भूमि में जंगल बना हुआ है। इसमें बबूल, छौंकरा और नीम आदि के हजारों पेड लगे हैं। ये जंगल कई वर्षो से बंदरों का आश्रय स्थल बन गया हैं। इसमें सैकडों बंदर मस्ती और किलोल करते देखे जा सकते हैं। यहां वनविभाग का वनचेतना केन्द्र प्रस्तावित है। वनचेतना केन्द्र कब बनेगा यह तो सरकार जाने, लेकिन बंदरों की अच्छी खासी भरमार हो गई है। जंगल के सामने हाईवे पर जैसे ही कोई वाहन ठहरता है, सैकडों बंदर हाईवे पर बाहर आकर एकत्रित हो जाते हैं और वाहन को घेर लेते हैं। उनकी उम्मीदें जग जाती हैं कि खाने को कुछ मिलेगा। ये भी नहीं हे कि ये बस्तु को प्राप्त करने के लिए संघर्ष करें या आपस में भिड जाएं या व्यक्ति पर हमला बोल दें। बच्चे भी इनके बीच खडे होकर हर मंगल या शनिवार को केले संतरा, या अन्य फल या फिर टमाटर , गोभी, चना मटर आदि बांटते देखे जा सकते हैं। आज तमाम श्रद्वालु इनके लिए टमाटर , चना आदि लेकर पहुंचे। हालांकि इनकी यहां बढती संख्या वाहनों के लिए किसी खतरे से कम नहीं है। क्यों कि ज्यादातर बंदर हर समय हाईवे के किनारे ही विचरण करते रहते हैं। यदि इनकी संख्या इसी द्रुति गति से बढी तो हाईवे से वाहनों का गुजरना मुश्किल हो जाएगा।
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ज्ंागल की भूमि पर बढ रहा अतिक्रमण, वृक्ष हो रहे शिकार
वनविभाग की छह एकड से ज्यादा भूमि मुददतों से बिना देखरेख के ही पडी है। हाल यह है कि आसपास के किसानों ने इस जमीन पर एन्क्रोचमेंट करना शुरू कर दिया है। वरन काफी भूमि वर्तमान में अतिक्रमण के कब्जे में है। इसके अलावा इस भूमि में लगे वृक्षों की संख्या भी तेजी से कम होती जा रही है। ग्रामीण पेडों को भी काट रहे हैं। वनविभाग के अधिकारियों को इस ओर देखने की सम्भवत कभी फुर्सत मिली हो।







