बीटेक छात्र ने हिन्दी में पढाई देख बीच में ही छोडी बीटीसी टेनिंग
भरत लाल गोयल, एडीटर पीडीयू समाचार
अंग्रेजी से तो स्टूडंेटस को घबराते हुए आपने देखा होगा, लेकिन एक छात्र ने हिन्दी भाषा से घबराकर प्रशिक्षण को बीच में ही छोड दिया हो, ऐसे उदाहरण कम देखने को मिलेंगे।
दरअसल वृन्दावन के मोहित ने बीटेक किया है। संयोग से सत्र 2017-18 में डीएलएड में उसका चयन हो गया। छात्र को फरह क्षेत्र का एक प्रतिष्ठित कालेज आबंटित हो गया। बीटीसी में चयन पर परिजनों की उम्मीदों को पंख भी लग गए। वर्तमान में बेसिक शिक्षक को 40 हजार सैलेरी प्रतिमाह प्राप्त होती है। जबकि बीटेक करने के बाद कोई भी कम्पनी इतनी सैलेरी नहीं प्रदान कर पाती। छात्र ने कुछ माह पढाई की, लेकिन पढाई और परीक्षा का माध्यम हिन्दी होने के कारण उसे पढने में दिक्कत हुई। अंतत हिन्दी माध्यम से परेशान होकर उसने बीटीसी कोर्स ही छोड दिया। बकौल छात्र, हिन्दी में ठीक से लिखने में दिक्कत आती है। चूंकि प्रशिक्षण हिन्दी में है। इस लिए कोई मैचिंग नहीं हो पा रही थी। घरवालों ने जबरन एडमिशन करा दिया। अ बवह बीटेक की डिग्री के आधार पर जाॅब करेगा। कई कम्पनियों से पैक्ट की बात हो रही हैं। बहरहाल कुछ भी हो, छात्र का कहना है कि भले बेसिक स्कूल हिन्दी मीडियम के हों, लेकिन कम्पटीशन के इस दौर में योग्य अभ्यर्थी भी टीचर बनना पसंद कर रहे हैं, लेकिन उनके सामने हिन्दी माध्यम दिक्कत बनकर सामने आ रहा हैं। लिहाजा सरकार को बीटीसी टेªनिंग का माध्यम अंग्रेजी भी कर देना चाहिए। ताकि सीबीएसई व केन्द्रीय स्कूलों से शिक्षित युवा इस ओर आकर्षित हो सकें।






