चुनावी साल से पहले ही सरकारों ने खोले बेरोजगारों की किस्मत के द्वार

– मप्र , राजस्थान, हरियाणा और बिहार सहित तमाम राज्यों में शिक्षित बेरोजगारों को निकालीं बम्पर भर्तियां
– उत्तरप्रेदश में होने जा रहीं 92 हजार अध्यापकों की भर्ती
भरत लाल गोयल, (सीनियर समाचार सम्पादक, पीडयू समाचार उप्र)
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च्ंाद कदम दूर चुनाव की आहट सरकारों द्वारा भर्तियों के खोले पिटारे को देखकर महसूस की जा सकती है। केन्द्र सहित हर राज्य सरकार ने नौकरियों की झडी लगा दी है। बेरोजगारों की किस्मत के द्वार खुलने जा रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि इन मौकों का लाभ शिक्षित युवा नहीं ले पाए तो उनको इसके बाद लम्बा इंतजार करना पड सकता है।
बहरहाल राजस्थान,मप्र और हरियाणा और झारखण्ड सहित कई राज्यों की बिधानसभाओं के चुनाव भी होने हैं। नतीजतन केन्द्र के साथ सुरताल मिलाते हुए राज्य सरकारों ने भी बम्पर भर्ती की फसल उगाह दी है। राजस्थान में दिसम्बर 18 में चुनाव होने हैं। मुख्यमंत्री बसुन्धरा राजे ने पुन सत्ता के गलियारों तक पहुंचने के लिए शिक्षित बेरोजगार युवाओं की कमजोर रग पर हाथ रख दिया है। वहां तूफानी बाढ नौकरियों की भर्ती की आ गई है। 1200 पद प्रधानाध्यापक, पांच हजार लेक्चरर, नौ हजार बरिष्ठ अध्यापक तो 54 हजार तृतीय श्रेणी अध्यापक सहित नर्स गे्रड द्वितीष् तृतीय, कृषि अधिकारी, बालविकास अधिकारी, संगणक, महिला सुपरवाइजर, आरएएस , 21 हजार सफाई कर्मियों, पशुधन सहायक भर्ती जैसे एक लाख पदों पर भर्ती प्रक्रिया तीव्र गति से शुरू कर दी गई है। इसी तरह मप्र में नौ हजार पटवारी भर्ती के बाद 3200 सहायक प्राध्यापक कालेज शिक्षा सहित अन्य तमाम विभागों में नौकरियों के द्वार खोले गए हैं। यही नहीं हरियाणा में भी अध्यापक भर्ती सहित पुलिस में भर्ती ख्ुली हैं। मोहनलाल खटटर के नेतृत्व वाली सरकार वहां नौकरियों अवसर के माध्यम से अपनी छवि को दुरूस्त करने में लगी है। इसी तरह झारखण्ड की रघुवरदास की सरकार छोटे से राज्य में भारी संख्या में रिक्तियां निकालकर युवाओं का दिल जीतने में लगी है। नवम्बर 19 में जहां 17 हजार टीजीटी शिक्षकों की भर्ती को लिखित परीक्षा सम्पन्न कराई तो तीन हजार दरोगाओं की भी सरकार ने वहां भर्ती की। इसके बाद सिपाही भर्ती पद पर भी आवेदन मांगे गए। इसके बाद मार्च में पीजीटी के 3050 पदों पर भर्ती को लिखित परीक्षा सरकार ने कराई। उप्र में कोर्ट के आदेश के बाद 92 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया तेज हो गई है। यही नहीं शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के गठन के बाद 25 हजार अध्यापकों के पदों पर भी इसी साल भर्ती होने की पूरी संभावना है।

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