बकरियों में सात दिवसीय कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ

फरह।देवेन्द्र गोस्वामी

आई.सी.ए.आर. – केन्द्रीय बकरी अनुसंधान, संस्थान, मखदूम फरह में 7 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया।  इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन डाॅ. बी.एस. प्रकाश सहायक महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 10 राज्यों के 20 प्रशिणार्थी भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बकरों में वीर्य हिमीकरण एवं कृत्रिम गर्भाधान के समय होने वाली जटिलताओं को दूर करना है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डाॅ. बी.एस. प्रकाश ने कहा कि देश में बकरियांे की संख्या दिन-प्रतिदिन घटती जा रही हैं। इसके लिए बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान का उपयोग कर बकरियों की नस्ल सुधार, संरक्षण एवं उनकी गुणवत्ता को बढ़ाने मंे सहायक सिद्ध होगी। इसके साथ किसानों की आय को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।

हमारे देश में बकरियों की आबादी साढ़े तेरह करोड़ है जिसमें से सात करोड़ दस लाख ग्याभिन योग्य बकरियां एवं एक करोड़ सात लाख प्रजनक बकरे है। सात करोड़ दस लाख बकरियों की ग्याभिन कराने के लिए बीस लाख बकरों की जरूरत होगी। यदि हमारे किसान भाई कृत्रिम गर्भाधान का उपयोग करें तो यह कार्य पचास हजार बकरों से ही सम्पन्न हो जाएगा। इस तकनीक का उपयोग कर उनके रखरखाव में होने वाली लागत को भी कम कर सकेंगे। जिससे उनकी आय भी दोगुनी हो सकती है जो कि हमारे प्रधानमंत्री का सपना है। इस तकनीक का विकास केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान में किया है और देशभर से आए लोगों को प्रशिक्षित कर इसका विस्तार किया जा रहा है।

इसके साथ ही संस्थान के निदेशक डाॅ. मनमोहन सिंह चैहान ने कहा कि कृत्रिम गर्भाधान का उपयोग कर युवा पीढ़ी अपनी आजीविका का स्त्रोत बना सकते है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश में अच्छे नस्ल की बकरों की कमी को देखते हुए इस तकनीक को अपनाकर उसकी उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है एवं इसके साथ ही अनावश्यक बकरों को न रखकर, रख-रखाव पर होने वाले खर्चो में कमी भी की जा सकती है। इस अवसर पर प्रशिक्षण निर्देशिका पुस्तक, बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान पर एक पत्रक का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया।

इस कार्यक्रम के संयोजक डाॅ. रविरंजन, डाॅ. एस.पी.सिंह. एवं डाॅ. चेतना गंगवार है। इस अवसर पर संस्थान के समस्त वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

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