मथुरा।विश्व बकरी दिवस-2025 के अवसर पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास कार्य योजना के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय “बकरी पालन से समृद्धि की ओर” रहा । इस अवसर पर मथुरा एवं भरतपुर जनपदों के लगभग 250 अनुसूचित जाति एवं जनजाति के बकरी पालकों ने भाग लिया ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, केन्द्रीय मंत्री, पशुपालन, मत्स्य, डेयरी एवं पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री सोनपाल, निदेशक, दीन दयाल शोध संस्थान, फरह, मथुरा उपस्थित रहे ।
संस्थान निदेशक डॉ. मनीष कुमार चेटली ने मुख्य अतिथि प्रो. बघेल एवं विशिष्ट अतिथि श्री सोनपाल सहित अन्य अतिथियों का पुष्पगुच्छ, पटुका एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर स्वागत किया । अपने स्वागत उद्बोधन में डॉ. चेटली ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य किसानों एवं बकरी पालकों को वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से आधुनिक बकरी पालन की दिशा में प्रेरित करना और उनकी आय दोगुनी करने में सहयोग प्रदान करना है । हमारा लक्ष्य कागज़ी नहीं, मापनीय परिणाम है—खेत-स्तर पर क्लाइमेट-स्मार्ट हाउसिंग, हरित चारा-कैलेंडर, फीड-कॉस्ट अनुकूलन और किड-सर्वाइवल में सुधार जैसी तकनीकों को इस तरह लागू कराना कि उनकी छाप सीधे उत्पादकता और आय में दिखे।”

हेड श्री मुकेश भगत का वक्तव्य:
“किसानों को हाउसिंग डिज़ाइन (उचित वेंटिलेशन-ड्रेनेज, भीड़-घनत्व), स्वच्छ बिछावन/फ्लोरिंग, मानसून व गर्मी में जल-छाया-हवादारी, तथा किड-कॉर्नर/क्रीप-एरिया पर हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया गया। सही फ़्लोर-प्लान और फीडर/वॉटरर की प्लेसमेंट से रोग-दबाव घटता है और किड-मैनेजमेंट मज़बूत होता है।”

डीएपीएससी के इंचार्ज डॉ. गोपाल दास का वक्तव्य:
“नस्ल-चयन, समयबद्ध प्रजनन प्रबंधन और किड-मॉर्टेलिटी में कमी ये तीन स्तंभ झुंड की आय निर्णायक रूप से बढ़ाते हैं। खेत पर क्वारंटीन पेन, सूखा-गीला ज़ोन और हीट-स्ट्रेस/मानसून प्रोटोकॉल अपनाना आवश्यक है। साथ ही प्रोडक्शन रिकॉर्ड व ब्रीडिंग लॉगबुक व्यवस्थित रखने से जोखिम घटता है और क्रेडिट-एक्सेस आसान होता है।”
माननीय केन्द्रीय मंत्री प्रो. बघेल ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा “लैब से लैंड तक” ज्ञान पहुँचाने का प्रयास सराहनीय है। उन्होंने किसानों व बकरी पालकों से आह्वान किया कि वे परम्परागत पद्धतियों के स्थान पर वैज्ञानिक एवं आधुनिक विधियों को अपनाएँ।
उन्होंने कहा कि कृषि एवं पशुपालन में हुई विभिन्न क्रांतियाँ वैज्ञानिकों के अथक प्रयासों का परिणाम हैं, जिससे भारत कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना है। बकरी पालकों को संस्थान की तकनीकों का अधिकाधिक लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एफ.एम.डी. (खुरपका-मुंहपका) मुक्त भारत से ही पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त होगी । प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि में संरचनात्मक और क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं—इन्फ्रास्ट्रक्चर, वैल्यू-चेन, डिजिटलीकरण और किसान-केंद्रित नीतियों से उत्पादकता और बाज़ार-जुड़ाव दोनों मज़बूत हुए हैं। आज भारत अनेक कृषि-उपक्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है, और हमारा संकल्प है कि विज्ञान-आधारित प्रशिक्षण व नवाचार के दम पर छोटे-सीमांत किसानों, महिलाओं और युवाओं तक यह प्रगति तेज़ी से पहुँचे।”
इस अवसर पर किसानों एवं बकरी पालन के सतत विकास हेतु युवान एग्रो, आगरा एवं शून्य एग्रो टेक के साथ संस्थान द्वारा तकनीकी सहयोग समझौता (MoU) हस्ताक्षरित किया गया । कार्यशाला के दौरान अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास कार्य योजना के अंतर्गत बकरी पालकों को आवश्यक सामग्री का वितरण भी किया गया ।
कार्यशाला में संस्थान के वैज्ञानिकों ने उपस्थित किसानों को वैज्ञानिक बकरी पालन की नवीनतम तकनीकों एवं प्रबंधन पद्धतियों की जानकारी प्रदान की ।
कार्यक्रम का संचालन डॉ0 ए0 के0 दीक्षित ने किया । इस अवसर पर कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. मुकेश भकत, डॉ. ए.के. दीक्षित, डॉ. गोपाल दास एवं डॉ. अरविन्द कुमार रहे । कार्यक्रम में संस्थान के सभी वैज्ञानिकों, प्रशासनिक एवं तकनीकी अधिकारियों-कर्मचारियों सहित बड़ी संख्या में किसान एवं बकरी पालक उपस्थित रहे ।






