गोवर्धन। स्वर्ण रजत एवं हरियाली के बीच विराजे गिरिराज प्रभु

गिरिराज प्रभु का हरित श्रृंगार करते वरिष्ठ सेवायत मथुरादास कौशिक उर्फ लाला पंडित।

DDU NEWS

गोवर्धन। हरियाली तीज पर दानघाटी मंदिर में स्वर्ण एवं रजत जड़ित पोशाक और हरियाली के बीच गिरिराज प्रभु ने भक्तों को दर्शन दिए। रविवार को प्रातः मंगलाभिषेक में वरिष्ठ सेवाधिकारी मथुरादास कौशिक उर्फ लाला पंडित के निर्देशन में गिरिराज प्रभु का गंगाजल, दूध, दही, शहद, इत्र आदि से अभिषेक कर आरती उतारी गई। दोपहर को फूल बंगला सजाकर प्रभु हरित श्रृंगार किया गया। दानघाटी मंदिर में विराजमान गिरिराज प्रभु हरियाली के बीच नजर आए। वैसे तो गिरिराज प्रभु हरी-भरी लता-पताकाओं के बीच में पूरे सात कोस में फैले हैं, लेकिन प्रमुख मंदिर दानघाटी में विराजमान गिरिराज प्रभु ने श्रीकृष्ण की बाल छवि में दर्शन दिए। शाम को हुए श्रृंगार में गिरिराज प्रभु के सिर पर चांदी का छत्र और चांदी-सोने जड़ित पोशाक और हाथ में सोने की बांसुरी के दर्शनों ने भक्तों का मन मोहा। ठाकुर जी के भव्य श्रृंगार दर्शन के साथ मंदिर के बाहरी और भीतरी भाग को प्राकृतिक शैली को ध्यान में रखते हुए फूलों का बंगला और आधुनिक रोशनी के लिए लाइट मंदिर के आंगन को रोशन कर रहीं थीं। वरिष्ठ सेवायत मथुरादास कौशिक लाला पंडित ने बताया की ब्रज में ठाकुर जी की पूजा बाल स्वरूप में ही की जाती है। यहां बालकपन में ही भगवान ने लीलाएं की हैं। इन लीलाओं के साक्षी हजारों वर्ष से गिरिराज प्रभु हैं। श्रावण महीने में झूलनोत्सव राधा और कृष्ण के प्रेम का प्रतीक हैं, पर यहां तो सात वर्ष की आयु में सात कोस में फैले गिरिराज पर्वत को उठाकर भगवान ने अपना स्वरूप प्रदान किया था। इन्ही गिरिराज देव को श्री कृष्ण के रूप में पूजा जाता है।

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