नई दिल्ली।ISI का ढाका प्लान…पाकिस्तान और बांग्लादेश का यह समझौता भारत के लिए चिंता का कारण क्यों है?

पाकिस्तान-बांग्लादेश में समझौता ऐसे समय में हुआ है जब भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं। भारत को डर है कि पाकिस्तान इस समझौते का इस्तेमाल भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए कर सकता है।

DDU NEWS

नई दिल्ली। पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच हुआ एक नया समझौता भारत के लिए चिंता की बात है। इससे पाकिस्तानी अफसर बांग्लादेश में बिना रोक-टोक आ-जा सकेंगे। 25 जुलाई को पाकिस्तान बांग्लादेश में हुए करार से भारत की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच संबंध सुधर रहे हैं जिससे भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच करार

समझौता के तहत राजनयिक और सरकारी पासपोर्ट धारकों को बिना वीजा के आने-जाने की अनुमति होगी। यह फैसला पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी और बांग्लादेश के लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जहांगीर आलम चौधरी के बीच ढाका में हुई बैठक में लिया गया। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के अफसरों का आना-जाना आसान हो जाएगा। इससे भारत की पूर्वी और उत्तर-पूर्वी सीमा पर सुरक्षा खतरा बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ढाका में पाकिस्तान की बढ़ती मौजूदगी से भारत विरोधी तत्वों को मदद मिल सकती है। इससे भारत की सीमाओं पर सुरक्षा बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा।बांग्लादेश के साथ भारत के संबंध चुनौतीपूर्ण बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के समय में भारत के साथ अच्छे संबंध थे। लेकिन, मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद बांग्लादेश पाकिस्तान के करीब आ रहा है। जबकि पहले पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच अच्छे संबंध नहीं थे। नई दिल्ली इस बदलाव पर नजर रख रही है। लेकिन उसे डर है कि क्षेत्र में बदलाव होने से ढाका में भारत का प्रभाव कम हो सकता है।

कैसे हुआ वीजा-मुक्त समझौता

पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच वीजा-मुक्त समझौता हाल ही में हुए कई उच्च-स्तरीय वार्ताओं के बाद हुआ है। इन वार्ताओं में सैन्य और आंतरिक सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल थे। जनवरी में, लेफ्टिनेंट जनरल एसएम कामरुल हसन के नेतृत्व में बांग्लादेश के एक वरिष्ठ सैन्य प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान का दौरा किया। उन्होंने सेना प्रमुख आसिम मुनीर और वायु सेना प्रमुख जहीर अहमद बाबर सिद्धू सहित शीर्ष रक्षा अधिकारियों से मुलाकात की। बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा, संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण और रक्षा व्यापार जैसे विषय शामिल थे।

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