केंवल दो कमरों में पढ़ने को विवश हैं 264 विद्यार्थी, पुराने भवन के गार्डर गल गए

फरहःश्रवण शर्मा
उमस के बीच 50 छा़त्रों के लिए बनाए गए एक कमरे में सौ से अधिक विद्यार्थी पढ़ने को विवश हैं। बिजली जाने के दौरान कमरों में बैठना मुश्किल है, लेकिन शिक्षा पाने की ललक विद्यार्थियों को ऐसे हाल में बैठने को विवश करती हैं। एक कमरे में दो- तीन कक्षाओं के विद्यार्थी शिक्षण ग्रहण करते हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा सका कि ऐसे हालात में शिक्षा का स्तर कैसा होगा।
कस्बा में आदर्श प्राथमिक पाठशाला का निर्माण सन 1962 में हुआ था। उस समय जिला पंचायत के अधीन बेसिक शिक्षा होने के से यह भवन ईंट और मिट्टी के गारे में बना था। तब से आज तक भवन की छत एक बार सही कराई गई, उस समय हल्के लोहे के गार्डर लगाए गए।
कस्बा के लोगों ने बताया कि इतने साल के दौरान रखरखाब नहीं होने से पत्थर के पटाव को लगाए गए लोहे के गार्डर अब गल गए हैं, जिससे यहां पढ़ने वाले बच्चों का जीवन हर समय खतरे में रहता है। अभिभावक नदीम और राकेश ने बताया कि वह बीते दिन पाठशाला में गए थे, जहां बरामदे के गार्डरों को गला देखा। उन्होंने बताया कि यह लोहे के गार्डर काफी गले हुए हैं, जिससे छत के गिरने का अंदेशा है। ऐसे में काफी अभिभावकों ने सुरक्षा के लिहाज से बच्चों को भेजना कम कर दिया है।
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बच्चों के सामने शिक्षा का संकट-
जहां पढ़ने के लिए भरपूर बच्चे हैं, वहां सुविधाओं का अकाल है, जहां बच्चे नहीं हैं, वहां सुविधाएं भरपूर हैं। इस प्राइमरी में दो पाठशाला मर्ज हो हैं, जिससें बच्चों की संख्या 264 हो गई, इन बच्चों को पढ़ाने के लिए 10 शिक्षक भी हैं। अभिभावक राजेंद्र ने बताया कि कस्बा में यहीं एक मात्र सरकारी स्कूल है, जहां गरीब अपने बच्चों को पढ़ाता है। अब भवन गिरासू है, जिससे बच्चों के जीवन पर हर समय मौत का खतरा मड़राता रहता है, कुछ तो बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। प्रधानाध्यापक वंदना सक्सेना ने बताया कि पुराने भवन के कमरों और बरामदों के लोहे के गार्डर गल गए हैं। अधिकारियों के निर्देश पर इतने सारे बच्चों को नए बने दो कमरों में पढ़ाना पड़ रहा है।
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अधिकारी की बात–
टीम के माध्यम से जांच कराई है। रिपोर्ट बनाकर जिलाधिकारी को भेज दी गई है, जल्द समस्या का समस्या का समाधान होगा। फिलहाल नए कमरों में कक्षा संचालित करने को कहा है।- विनय प्रताप सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी।






