– कहा, सरकार अपने कोष से दे वित्त विहीन शिक्षकों को वेतन

मथुरा /फरह | वित्त विहीन इंटर कॉलेज प्रबंधकों और शिक्षकों ने गुरुवार को मानदेय के निर्धारण प्रक्रिया और बोर्ड परीक्षा शुल्क की वृद्धि को लेकर डीआईओएस के पी सिंह को ग्यापन दिया, इसमें कहा गया कि प्रदेश में वित्त वित्तविहीन इंटर कॉलेज माध्यमिक शिक्षा की रीड बन गए हैं | ग्रामीण क्षेत्रों में 85 फीसदी शिक्षा की अलख इन स्कूल, कॉलेजों से जगाई जा रही है | संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में 25 हजार इंटर कॉलेजों में से 20 हजार से ज्यादा वित्त विहीन है | जिनमे तीन लाख अध्यापक /अध्यापिकाएं एक करोड़ छात्रों को पढ़ा रहे हैं | जबकि इनकी फीस 50 से लेकर 300 रुपये प्रति छात्र निर्धारित है | इतनी फीस से कॉलेज के प्रशासनिक खर्चे भी नहीं चल पा रहे हैं |सरकार की वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय देने की घोषणा एक अच्छी पहल है, किंतु निर्धारित 15 हजार रुपये का मानदेय प्रदेश सरकार अपने कोष से प्रदान करे | इसके अलावा पदाधिकारियों ने कहा कि बोर्ड परीक्षा की फीस अचानक तीन गुना बढ़ा दी गई है, जो गलत है | संगठन इसका विरोध करता है |ग्यापन देने वालों में संयोजक निरंजन सिंह सोलंकी, सतेंद्र ठाकुर, पुष्पेंद्र सिंह, राजेश गौतम व सेकड़ों शिक्षक मौजूद थे |






