-देव उत्थान एकादशी से शुरू हो सकेंगे विवाह आदि
भरत लाल गोयल, पीडि़यू समाचार

मथुरा | इस बार देवशयनी एकादशी 12 जुलाई को है । इस दिन से मांगलिक कार्यों पर चार माह के लिए ब्रेक लग जाएगा | माना जाता है कि इस दिन से भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाएंगे। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इसके बाद चार महीने तक कोई भी शुभ कार्य नहीं होगा। देवोत्थान एकादशी से ही पुन देव जाग्रत होंगे और मांगलिक कार्य प्रारंभ हो पाएंगे | पुराणों में बताया गया है कि देवशयनी एकादशी से लेकर अगले चार महीने के लिए भगवान देवप्रबोधनी तक निद्रा में चले जाते हैं। बामन पुराण में बताया गया है कि असुरों के राजा बलि ने अपने पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। राजा बलि के आधिपत्य को देखकर इंद्र देवता घबराकर भगवान विष्णु के पास मदद मांगने पहुंचे।

दो पग में नापा धरती-आकाश
भगवान विष्णु वामन अवतार धारण कर राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंच गए। भगवान वामन ने बलि से तीन पग भूमि मांगी। पहले और दूसरे पग में भगवान ने धरती और आकाश को नाप लिया। तीसरा पग रखने के लिए कुछ बचा नहीं तो राजा बलि ने कहा कि तीसरा पग उनके सिर पर रख दें। भगवान विष्णु राजा बलि के दान धर्म से बहुत प्रसन्न थे। उन्होंने राजा बलि से वरदान मांगने को कहा तो बलि उनसे पाताल में उनके साथ बसने का वर मांग लिया। बलि की इच्छापूर्ति के लिए भगवान को उनके साथ पाताल जाना पड़ा।

राजा बलि को दिए वरदान के कारण ही आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तक पाताल लोक में वास किया। पाताल लोक में उनके रहने की इस अवधि को योगनिद्रा माना जाता है।






