हरेकृष्ण गोयल

मांट। गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ सुरीर क्षेत्र में डायरिया की बीमारी पांव पसारने लगी है। पिछले दो दिन में डायरिया से पीड़ित दो दर्जन से अधिक मरीज निजी डॉक्टरों के यहां इलाज करा रहे हैं। डायरिया से भट्ठे पर एक बालक की मौत हो गई है। सुरीर क्षेत्र में दो वर्ष पहले इसी मौसम में डायरिया ने महामारी का रूप धारण कर लिया था। इस बीमारी की चपेट में आने से डेढ़ दर्जन लोगों की मौत हो गई थी। जिनमें अधिकांश बच्चे थे। इस बार भी गर्मी में डायरिया का संक्रमण फैलने लगा है। भीषण गर्मी और खानपीन में लापरवाही के चलते आसपास गांवों के अलावा ईंट भट्ठों पर काम करने वाले मजदूर डायरिया की चपेट में आने लगे हैं। शनिवार को भदनवारा के समीप कान्हा भट्ठा पर काम कर रहे बिहारी मजदूर विनोद मंडल के चार वर्षीय बेटे सहवाग की उल्टी दस्त में मौत हो गई। कस्बा स्थित सरकारी अस्पताल पर समुचित उपचार की व्यवस्था न होने से दो दर्जन से अधिक पीड़ित इधर उधर प्राइवेट डॉक्टरों के यहां उपचार करा रहे है। उधर डायरिया के संक्रमण से बच्चे की मौत की खबर पर रविवार को हरकत में आई स्वास्थ्य विभाग की टीम ईंट भट्ठों की ओर दौड़ पड़ी। नौहझील सीएचसी के डॉ.चंदन के नेतृव में आई स्वास्थ्य टीम में रविवार को सुरीर क्षेत्र में कई ईट भट्ठों पर जाकर मजदूरों को साफ-सफाई का पाठ पढ़ाते हुए डायरिया से बचाव के लिए जागरूक किया और ओआरएस घोल समेत दवाओं का वितरण किया और लोगों को गर्मी में धूप ताप से बचने एवं खानपान में सावधानी बरतने की सलाह दी। टीम में उमेश गुप्ता, देवेंद्र यादव एवं रमेश आदि स्वास्थ्य कर्मी शामिल थे। गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ डायरिया पांव पसार चुका है। स्वास्थ्य महकमा उदासीन रवैया अपनाए हुए है। सुरीर क्षेत्र में डायरिया का संक्रमण तेजी से फैलने लगा है। चपेट में आने से शनिवार को एक बच्चे की मौत हो गई है। दर्जनों बीमार हैं जो निजी डॉक्टरों के यहां उपचार करा रहे है। स्वास्थ्य टीमें कुछ भट्ठों पर दवा गोली बांट कर कोरम पूरा करने में लगी है। सुरीर अस्पताल पर न तो समुचित दवा एवं सुविधाएं हैं और न ही किसी चिकित्सक की तैनाती की है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुरीर सिर्फ फार्मासिस्ट एवं वार्डवॉय के भरोसे चल रहा है। जिससे पीड़ित मरीज निजी चिकित्सकों के यहां इलाज कराने को मजबूर है। कराहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत भी अमूमन ऐसी ही हैं। यहां भी मरीजों के उपचार के लिए कोई चिकित्सक नहीं हैं। जिससे मरीजों को समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। जबकि इन दिनों बीमारियों का मौसम चल रहा है।
पेय पदार्थों में कच्ची बर्फ का धड़ल्ले से प्रयोग कर रहे हैं। जिससे गर्मीजनित बीमारी के संक्रमण पनप रहे है। इन दिनों ठेलों पर बर्फ के गोले, रबड़ी-मलाई के गिलास, शिकंजी, लस्सी, गन्ने का रस, मैंगो शेक समेत पेय पदार्थ बिक रहे है। इन पेय पदार्थों की गुणवत्ता एवं स्वच्छता का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। दूषित एवं गंदगी के कारण इनके सेवन से डायरिया, डिहाइड्रेशन, पेटदर्द जैसी बीमारियां पनप रही हैं। चिकित्सकों का कहना है कि पेय पदार्थों में कच्ची बर्फ के सेवन से जानलेवा संक्रमण हो सकता है। इससे पेट में संक्रमण, उल्टी, दस्त, सर्दी, जुकाम और गले संबंधी बीमारियां हो सकती हैं।






