-किसी भी प्रत्याशी ने तहसील मुख्यालय पर वोट नहीं मांगे न ही कोई जन सभा हुई
-पूरे क्षेत्र में इस बार अभी तक नहीं मिला आचार संहिता उल्लंघन का कोई मामला
हरेकृष्ण गोयल

मांट। इस बार का लोकसभा चुनाव मांट कस्बा के लिए कुछ अलग हट कर रहा,जिसे शायद लम्बे समय तक याद रखा जाएगा। किसी प्रत्याशी ने तहसील मुख्यालय होने के बाबजूद मतदाताओं से वोट नहीं मांगे। मथुरा में गठबंधन प्रत्याशी के अलावा भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशी के मध्य मुकाबला माना जा रहा है।तीनों में से मात्र एक प्रत्याशी केवल अपने कार्यालय के उद्घाटन के वक्त ही कस्बा में आए, उसके बाद किसी ने कस्बा में वोट मांगना जरूरी नहीं समझा, इस बात की टीस हरेक आम मतदाता को है। हरेक लोकसभा व विधानसभा चुनावों में कस्बा में कोई न कोई बड़ी सभा होती रही है,पर इस बार ऐसी कोई सभा भी नहीं हुई, दो प्रत्याशियों के पक्ष में छोटी छोटी सभाएं हुई, पर उनमें प्रत्याशी शरीक नहीं हुए। किसी ने नहीं पूजे बेरू बाबा मांट राजा में यमुना किनारे बेरू बाबा का मंदिर है,बेरू बाबा को कस्बा के लोग कुलगुरु की तरह पूजते हैं,किसी भी शुभ काम की शुरुआत या कोई मनोकामना पूरी होने पर मंदिर में मिट्टी की नांद चढ़ाने का बहुत पुराना रिवाज है।ग्राम प्रधान के चुनाव से लेकर लोकसभा तक के चुनाव के प्रत्याशी मांट में प्रवेश करते ही बेरू बाबा से आशीर्वाद लेना नहीं भूलते हैं। पर इस बार कोई यहां भी नहीं पहुंचा।
अधिकारियों ने बरती नरमी
निर्विघ्न और निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न कराने के लिए तमाम अधिकारी लगे हुए हैं,इसमें उड़नदस्ता भी तैनात हैं,पर उड़नदस्ता में तैनात स्टाफ केवल औपचारिकता निभाता नजर आया,अब जबकि मतदान में मात्र 24 घण्टे बाकी रह गए हैं,ऐसे में भी किसी अधिकारी को पूरे इलाके में विभिन्न दलों के स्टीकर व पोस्टर झंडा या नेम प्लेट लगी एक भी गाड़ी नजर नहीं आयी।पूरे चुनाव प्रचार के दौरान प्रत्याशियों के पक्ष में बिना अनुमति के प्रचार वाहन दौड़ते रहे,पर अधिकारियों को यह भी नजर नहीं आया।






