– हार्टफुलनेस संस्था की ओर से त्रिदिवसीय कार्यशाला का किया गया आयोजन
भरत लाल गोयल, पीडि़यू समाचार

फरह | सचदेवा इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाॅजी फरह, मथुरा में विज्ञान प्रसार क्लब के अन्तर्गत तीन दिवसीय कार्यशाला ‘‘हार्टफुलनेस वर्कशाॅप’’ का आयोजन किया गया, जिसमें ध्यान प्रशिक्षण पर बल दिया गया | एक एनजीओ हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट की ओर से रविवार को सचदेवा में समस्याओं को सुलझाने में मदद करने के लिए सरल क्रमिक विश्राम और इनर जर्नी समाधानों की एक समृद्ध विविधता प्रदान करने वाले कार्यक्रम का आयोजन किया गया | इसके तहत शिक्षक हो या व्यवसायिक कार्यकारी| विज्ञान का छात्र हो या कला का| हर कोई पूर्णता और उत्कृष्टता का मार्ग अपना सकता है। बताया गया कि हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट 130 से अधिक देशों में स्थित 5000 से अधिक केन्द्रों के माध्यम से निःशुल्क ध्यान प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है।

कार्यशाला के पहले दिन प्रशिक्षकों ने सभी के जीवन में ध्यान के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि विश्राम के माध्यम से ध्यान करने की तकनीकि को संस्थान ने ‘‘हार्टफुलनेस’’ का नाम दिया है, जो काफी सरल और व्यावहारिक है तथा आध्यात्म के लिए एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है, जिससे व्यक्ति आंतरिक अवस्थाओं का अनुभव कर सकता है।
सत्र का दूसरा दिन ध्यान की अवधारणा के साथ शुरू हुआ। विभिन्न अवधारणाओं का उल्लेख करते हुए प्रशिक्षकों ने बताया कि जिस प्रकार परिवेश को प्रदूषण मुक्त करने के लिए निरंतर सफाई की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मन को विभिन्न कारकों से स्वच्छ रखने के लिए प्रतिदिन ध्यान के आवश्यकता की नितांत जरूरत है।
कार्यशाला के अंतिम सत्र में दैनिक प्रार्थना सम्बंधित धारणाओं से प्रशिक्षणार्थियों को अवगत कराया गया। हार्टफुलनेस मेडिटेशन तकनीकि के अनुसार प्रार्थना ईश्वर से जुड़ने का महत्वपूर्ण साधन है। इसी के अन्तर्गत प्रशिक्षकों ने दैनिक प्रार्थना के माध्यम से ह्दय एवं मन को जोड़ने की अवधारणा से अवगत कराया।
हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के प्रशिक्षकों की टीम में ज्ञानेश्वर दयाल सरीन, अनुज गोयल, डाॅ. हर मोहन सिंह और सचिन अग्निहोत्री शामिल रहे। संस्थान के चेयरमैन डाॅ. सुधीर सचदेवा ने हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि आधुनिक युग में व्यक्ति की व्यस्त जीवनशैली है | वह विभिन्न परेशानियों से ग्रसित रहता है, जो मानसिक तनाव का जनक है। हार्टफुलनेस मेडिटेशन तनाव को मुक्त कर मन को शांत रखने का बेहतर जरिया है। इस तकनीकि के माध्यम से मनुष्य के व्यक्तित्व में सकारात्मक ऊर्जा का संचरण होता है साथ ही तनाव रहित हो जाता है। कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रशिक्षकों का स्वागत डीन एकेडमिक डाॅ. भोले सिंह ने किया। इस में 250 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
कार्यशाला समापन के दौरान संस्थान के चेयरमैन डाॅ. सुधीर सचदेवा, सहायक निदेशक डाॅ. एके सिंह, डीन एकेडमिक डाॅ. भोले सिंह, एसजीसीए प्रोसिडेंट मोहित गहरवार, समस्त विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहै।






