हरेकृष्ण गोयल,
भारत केसरी और बृज केसरी की कुश्ती बराबरी पर छूटी
दर्जनों पहलवानों ने हाथ आजमाए

मांट। होली के बाद जावरा गांव में होने वाले परम्परागत कुश्ती दंगल में आखिरी कुश्ती भारत केसरी सुथरिया हाथरस निवासी हरिकेश पहलवान व बृज केसरी सिहोरा के देवेंद्र पहलवान के मध्य हुई।
इस रोमांचक मुकाबले को दूर दराज से आये हजारों दंगल प्रेमी दिल थाम कर देखते रहे,दोनों नामी गिरामी पहलवानों से मिलने को हरेक आम व खास लालायित दिख रहा था।काफी देर तक हरिकेश मैदान में चुनोती देते हुए कुश्ती लड़ने के लिए पहलवानों को चुनोती देता रहा,सूर्यास्त के वक्त सिहोरा से आये देवेंद्र पहलवान ने चुनोती स्वीकार की,और जैसे ही दोनों पहलवान आमने सामने आए, लोगों की निगाहें उनके दांव पेंच पर टिक गईं।वहीं नए पहलवान उनके हर दांव पेंच को मोबाइल में कैद करते रहे,ताकि उनसे कुछ सीख मिल सके। करीब 15 मिनट चले मुकाबले में रेफरी द्वारा कुश्ती बराबरी पर छूटने के एलान किया।

इससे पहले मास्टर जालिम सिंह की स्मृति में उनके भाई ओंकार पहलवान ने कुश्ती कराई जिसे अखाड़ा भूतेश्वर के पहलवान पवन ने जीता। कई अन्य रोमांचक मुकाबलों में तिरवाहा के हरिओम पहलवान ने बसेला के शिब्बो पहलवान को धूल चटाई,श्याम सिंह भगतजी की स्मृति में जितेंद्र सिंह मास्टर द्वारा कराई गई भूरा पहलवान बसेला और मई निवासी लाला पहलवान के बीच कुश्ती बराबरी पर छूटी। अन्य मुकाबलों में खुर्रम के अजित पहलवान,जावरा के भुल्ली पहलवान,गोपाल आश्रम के जनक सिंह,तिरवाहा के रहीश व जावरा के श्याम ने मुकाबले जीते।इस दौरान देर रात को रामदेव सेठ की मार्किट के सामने जिकड़ी भजन प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया।
रेफरी की भूमिका लच्छो पहलवान, भीमा पहलवान,रामवीर पहलवान और मुंशी पहलवान ने निभाई।
ये रहे मौजूद
दंगल के दौरान पप्पन बोहरे,सुभाष मास्टर,नेम सिंह,बच्चन सिंह,हाकिम सिंह,घूरे सिंह,कारेलाल, रामवीर सिंह,अरुआ प्रधान पप्पू चौधरी,रिंकू चौधरी आदि मौजूद थे,संचालन ओमवीर सिंह ने किया।






