मथुरा/बल्देव,(परीक्षित कौशिक):-

बलदेव में चल रहे 21 कुंडीय श्री बलभद्र महायज्ञ के चौथे दिन यज्ञ में आहुति देने सपत्नीक पहुंचे भागवत भास्कर श्री कृष्ण चंद्र ठाकुर जी महाराज ।
इस अबसर पर उन्होंने यज्ञ शाला में ब्रज के राजा दाऊजी महाराज के पुष्पार्चन में भी पूजा अर्चना की।
उन्होंने कहा कि यज्ञ जीवन को पवित्र करता है। प्रत्येक व्यक्ति का जीवन यज्ञमय होना चाहिए।उन्होंने कहा कि यज्ञ प्रकृति प्रदत्त जल, अग्नि, रस, वायु के शुद्धीकरण का भी श्रेष्ठ साधन है। यज्ञ प्रकृति से शोषित ऊर्जा का प्रत्यावर्तन है। अन्न का उत्पादन पृथ्वी का यज्ञ है। प्रकृति माता मानव रूपी संतानों के अनेक अपराधों को क्षमा करती हैं। प्रकृति का उपयोग करना उत्तम है कितु उसका शोषण व दोहन करना अनिष्टकारी रूप धारण कर लेता है। उन्होंने कहा कि इस सृष्टि में नैतिक मूल्यों को टिकाए रखने के लिए इसके पीछे लोगों की तपस्या का होना जरूरी है।
श्री ठाकुर जी ने दाऊजी महाराज
व कृष्ण जी की बाल लीलाओं पर भी प्रकाश डाला।उन्होंने कहा कि ब्रज मंडल न तीर्थ है न धाम ये तो कृष्ण बलराम जी का घर है।
यज्ञ में भागवत वक्ता मंनोज मोहन शास्त्री जी,मृदुल कृष्ण शास्त्री ने भी पहुँच कर आहुतियां दीं ।
सभी अतिथियों का कार्यक्रम संयोजक राजाराम पांडेय, यज्ञाचार्य आचार्य विष्णु ने स्वागत किया।
रुक्मणि विवाह में झूम उठे श्रदालु
बल्देव- दाऊजी मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के छठवें दिन कृष्ण-रुक्मिणी के विवाह का सुंदर प्रसंग श्रोताओं को सुनाया गया। कथा वाचक उमेश्वरानंद महाराज ने कथा में बताया भगवान कृष्ण का रुक्मिणी के साथ विवाह संसार का सबसे सुंदर वर्णन है। महाराज ने बताया भगवान कृष्ण की लीलाएं प्रेरणादायी हैं। प्राणी जगत को इसका अनुशरण करके धर्म की स्थापना में अपना सहयोग निभाना चाहिए। कथा में सुंदर भजनों की तान पर श्रोतागण नतमस्तक होकर झूमने लगे।






