मथुरा/गोवर्धन,(परीक्षित कौशिक):-

बरसाना में लठामार होली से पहले रंग-गुलाल और लड्डुओं की होली खेली गई।
कहावत है कि जब जग होरी जा ब्रज होरा। वास्तविकता में यही कहावत वर्तमान में उत्तर प्रदेश मथुरा के बरसाना व नंदगांव की गलियों में चरितार्थ हो रही है। बरसाना राधारानी का गांव है और नंदगांव श्रीकृष्ण का है। पौराणिक आधार पर द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने राधारानी व उसकी सखियों के साथ होली खेली तो नटखट कन्हैया के उत्पात से नाराज होकर राधारानी ने सखियों के संग लाठी से प्रहार किया था। यही प्रेम की होली हजारों वर्ष से चली आ रही है। इसी परंपरा में 15 मार्च शुक्रवार की सांय को नंदगांव के हुरियारे बरसाने की हुरियारिनों से होली खेलने आएंगे। बरसाने हुरियारिन नंदगांव के हुरियारों पर खूब लाठिया बरसाएंगी।

इन लाठियों को कई दिन पूर्व से तैयार कर लिया गया है। दूसरे दिन 16 मार्च शनिवार को को अपनी हुरियारिनों का बदला लेने के लिए बरसाने के हुरियारे नंदगांव होली खेलने जाएंगे। बरसाने में लठामार होली से पहले गुरूवार को रंग जी महल में लड्डूमार होली खेली गई। होली से पूर्व रसिया गायन और नृत्य की थिरकन पर श्रद्धालु भावविभोर दिखायी दिये। गुरूवार को ही कान्हा के गांव नंदगांव में राधारानी के गांव बरसाना से लठामार होली का निमंत्रण पहुंचा। बरसाना से लाडली जी की दर्जन भर से अधिक सहचरी ढोल नगाडों के साथ नंदभवन पहुंचीं। सखियों के नंदभवन में प्रवेश करते ही पहले से पलक पांवडे बिछाये ग्वालों ने सभी सखियों का चुनरी उढाकर स्वागत किया। आदर के साथ गोस्वामीजनों का एक समूह सभी सखियों को कन्हैंया के निज महल की ओर ले गए। मंदिर के अन्दर पहुंचकर सखियों ने फाग के निमंत्रण रूपी गुलाल एवं लाडली जू की भेंट सेवायतों को कन्हैंया के श्री चरणों में रखने के लिए दी। लाडली जी का भेजा हुए संदेश सुनाते हुए सखियों ने कन्हैंया से कहा कि कल आप अपने समस्त सखाओं केा लेकर बरसाना लठामार होली के लिए आमंत्रित हैं। विश्व प्रसिद्ध लठामार होली के लिए बरसाना से राधे जू के भेजे निमंत्रण को पाकर गोप और ग्वालों की खुशी का ठिकाना न रहा। गोप ग्वाल सब एक दूसरे को बधाई देने लगे। इसी दौरान सेवायत ने लाडली जी की भेजी गुलाल की हांडी को कन्हैंया के श्री चरणों में रखा और सखियों का आग्रह भी सुनाया। इसके बाद सेवायतों ने सखियों का प्रतिनिधित्व कर रही राधा सखि को कन्हैंया का प्रसादी लड्डू, इत्र फोहा आदि भेंट किया। तदोपरान्त ग्वालबाल सखियों से बरजोरी कर जगमोहन तक लेकर आए। वहां पहले से सजे धजे तैयार बैठे गोप व ग्वालों ने होली के रसियाओं पर जमकर नचाया। सखियां भी कहां हारने वाली थीं, चार चार ग्वालेंा पर एक एक सखी नृत्य में भारी पड रही थीं। एक ओर जहां ग्वाल और गोपों का निमंत्रण पाकर उत्साह दुगना था तो वहीं सखियां भी लठामार होली से पहले रसिया होली में हारकर लाडली के सामने नहीं लौटना चाहती थीं। एक दूसरे को पराजित करने की होड में करीब साडे तीन घंटे जमकर नृत्य हुआ। इस दौरान श्रोता और दर्शक बने भक्त भी सखियों और ग्वालों की प्रतिस्पद्र्धा का जमकर आनंद उठा रहे थे। कोई भी इस दुर्लभ दृश्य का एक पल भी गंवाना नहीं चाहता था। लम्बे समय बाद संकेत हुआ कि कार्यक्रम का समापन किया जाना चाहिए। होरी के रसिया के जयघोष के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। कार्यक्रम समापन के पश्चात सखियों को राजभोग कराया गया। इसके बाद ग्वालों ने सखियों का निमंत्रण स्वीकार कर बरसाने आकर होली खेलने का आश्वासन दिया। आश्वासन के बाद गोपियां बरसाना के लिए प्रस्थान करती हैं। इसके बाद बरसाना में लड्डूमार होली का आयोजन हुआ।
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ये होली के कार्यक्रम
बरसाना की लठामार होली 15 मार्च
नंदगांव की लठामार होली 16 मार्च
मथुरा भगवान श्रीकृष्ण जन्मस्थान 17 मार्च
गोकुल में छड़ीमार होली 18 मार्च
20 मार्च होलिका दहन फालेन का पंडा आग से निकलेगा
21 मार्च द्वारिकाधीश मंदिर मथुरा की होली
22 मार्च दाऊ जी का कोड़ेमार हुरंगा
22 मार्च को मुखराई चररूकुला नृत्य
26 मार्च को मानसी गंगा दसविसा ब्राह्मणान हुरंगा एवं होली महोत्सव
29 मार्च को जतीपुरा गिरिराज जी मंदिर में फूल डोल महोत्सव






