हरेकृष्ण गोयल,
मांट। बसन्त पंचमी से शुरू हो जाने वाली होली से अभी तक देहात की होली अछूती है। होली में 10 दिन बाक़ी हैं और होली के रंग कहीं दिख ही नहीं रहे हैं।
ब्रज में परम्परा है कि बसन्त पंचमी से ही यहाँ होली शुरू हो जाती है। कुछ साल पहले तक स्थिति यह हुआ करती थी कि देहात में जगह जगह होली शुरू हो जाया करती थी। कहीं रंग गुलाल की तो कहीं लठामार होली। पर समय के साथ साथ सब बदल चुका है। देहात में बसन्त पंचमी से लेकर होलिका अष्ठक के बीच जो भी शादियां होती थीं ज्यादातर में होली खेलना एक तरह से रिवाज जैसा बन चूका था। पर सारी परम्पराएं अब पीछे छूट गयीं।
पिछले एक दशक से देहात में होली की देवर भाभी की हंसी ठिठोली भी अब बस कहानी किस्सों की बात रह गयी है। एक जमाना था कि बुजुर्ग भी अपने से बहुत कम की उम्र की महिला के साथ होली खेल लेते थे।और हंसी ठिठोली कर लेते थे। परंतु सब एक सीमित दायरे में होता था। धीरे धीरे शराब के नशे में चूर होकर युवाओं ने हंसी ठिठोली को अश्लीलता का जामा पहना दिया बस इसी के चलते धीरे धीरे हंसी ठिठोली भी लुप्त प्राय होने के कगार पर है।

केवल मंदिर और आश्रमों में ही दिखती है होली
देहात में होली का उत्साह लगभग खत्म होने के बाद ऐसा लगता है कि होली केवल अब ब्रज के मंदिर और आश्रमों तक ही सीमित रह गयी है।देहात में जगह जगह होने वाले होली मिलन समारोह भी सिमटते नजर आते हैं।मात्र दो दिन की होली रह गयी है अब गांवों में। धुलेड़ी और उसके उसके अगले दिन ही रंग गाँवो में देखने को मिलता है उसके पहले और बाद में नए कपडे पहन कर कोई निकल भी जाये तो एक बून्द रंग कोई उनके ऊपर नहीं डालेगा।
खत्म हो गयी कीचड़ होली
गांवों में होने वाली कीचड़,गोबर की होली भी लगभग लुप्त हो गई। कोई जमाना था कि मनचाहे जिस को कीचड़ में डुबो दिया जाता था। वहीं धुलेड़ी के दिन कस्बा में निकलने वाली चौपाई भी पूरी तरह लुप्त होने के कगार पर है। वहीं कस्बा में अब समय के साथ साथ रंग गुलाल लगाने से भी लोग कतराने लगे हैं।

हुड़दंग के चलते पुलिस ने की सख्ती
पुलिस प्रशासन की सख्ती से भी होली का हुड़दंग कम हुआ है। गाँवो में होली के नाम पर कभी जम कर हुड़दंग हुआ करता था। जिसमे कई बार मामला थाने चौकी तक पहुँच जाता था। जिसमे हुड़दंगियों को समय पैसा खर्च करने के साथ कोर्ट के भी चक्कर काटने पड़ते थे।इसके चलते अब लोग सतर्क हो गए हैं।






