भरत लाल गोयल, पीडि़यू समाचार

मथुरा | शहीद परिवारों की अनदेखी सरकार को भारी पड़ सकती है | परिजनो का कहना है कि सरकार अपने वायदे से मुकर रही है | जनपद में अब तक 88 शहीद परिवार है| लोगों का कहना है कि
शहीद परिवारों के साथ भेदभाव किया रहा है, उनका यह भी कहना कि यदि उनको
न्याय नहीं मिला तो वे धरने पर बैठने को मजबूर होगे|
बता दे कि
योगीजी ने अप्रैल 2017 से अब तक शहीद हुए परिजनों के एक व्यक्ति को 6 मार्च को योग्यता के आधार पर नौकरी दी है |
इससे पहले के शहीद परिजन संत्रास झेल रहे है | परिजनो का कहना है कि भेदभाव पूर्ण नीति क्यू..?
ये शहीद परिवारों के साथ छलावा नहीं तो क्या है| ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले शहीद हुए सैनिको को शहीद नहीं माना जाए, | लोगों का कहना है कि उनके परिजनों पर क्या बीत रही होगी, जिन्होंने अपना बेटा,पिता या पति को सीमा पर खोया हे और सरकार हस्यास्पद कानून बनाकर उनका मजाक बना रही हो |
क्या उनके परिजनो ने अपना सदस्य देश के लिए नही खोया है, यह सवाल उनको आज भी कचोट रहा है |






