MATHURA-बिना भोजन के कार्बोहाइड्रेट का प्रयोग बढा रहा मधुमेह की समस्याः प्रो छिब्बर

-हिन्दुस्तान कालेज आफ इंजीनियरिंग में हुआ तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन
-जर्मनी और कनाडा के पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों ने लिया भाग


भरत लाल गोयल, न्यूज एडीटर पीडीयू समाचार
हिन्दुस्तान कॉलेज ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी के बायोटेक विभाग में ‘जलवायु परिवर्तन के तहत पौधों, पशु और मानव स्वास्थ्य के लिए आनुवांशिकी, पश्च आनुवांशिकी, पर्यावरण और पोषण की भूमिका’ पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन जर्मनी की प्रो. गिरलिंडे ए.एस.मिट्ज, कनाडा के वैस्टर्न ऑनटेरियो विश्वविद्यालय के प्रो. रविन्द्र छिब्ब्र, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. गिरधर पाण्डेय, जे.एन.यू., दिल्ली के प्रो. सुनील कटेरिया के विशेष व्याख्यान ने पर्यावरण संबंधी समस्याओं के समाधान की राह दिखाई।


अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में जर्मनी की प्रो. गिरलिंडे ए.एस.मिट्ज ने बताया कि वर्तमान समय में मानव जीवन में प्राकृतिक आपदाओं एवं दैनिक क्रियाओं द्वारा उत्पन्न तनाव एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में आनुवांशिक कारणों से स्थानांतरित हो रहा है। उन्होंने अपने शोध में मादा चूहों का उदाहरण दिया। मादा चूहा पर उन्होंने लगातार पाँच पीढ़ियों तक अध्ययन किया और इस प्रक्रिया को अपने शोध में प्रकाशित किया। उन्होंने बताया कि अगर तनाव के वजाय स्वस्थ वातावरण प्रदान किया जाये तो अगली तीसरी-चौथी पीढ़ी खुशहाल एवं स्वस्थ उत्पन्न होगी। सीधा भाव था कि पर्यावरणीय कारक हमारे आनुवांशिक पदार्थ को प्रभावित कर रहे हैं। इस संदर्भ में उन्होंने योग का उदाहरण देते हुए कहा कि इसके माध्यम से हम खुशहाल तथा मानसिक एवं शारिरिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं।
कनाडा के वैस्टर्न ऑनटेरियो विश्वविद्यालय के प्रो. रविन्द्र छिब्ब्र ने बताया कि अनाजों के कार्बोहाइड्रेट से खाद्य एवं पोषण सुरक्षा में सुधार की असीम सम्भावनायें हैं। अपने शोध में स्पष्ट किया कि कार्बोहाइड्रेड समस्या भी हैं समाधान भी। यदि हम अधिक मात्रा में बिना भोजन में विवधता किय,े बिना अनाजों के काबोहाइड्रेट का प्रयोग करते हैं तो मोटापा, मधुमेह टाइप-2 का कारण बनते हैं। दूसरी तरफ भोजन में कार्बोहाइड्रट की कमी कुपोषण को जन्म देती है जो एक विश्व व्यापी समस्या है। उन्होंने बताया कि स्वस्थ रहने के लिए हमें उपचार के बजाय रोगों के रोकथाम की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि दाल और चावल को एक साथ खाने का मुख्य कारण भोजन में कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन संतुलन बनाये रखना है। अंत में उन्होंने कहा कि सुतलित आहार द्वारा हम दैनिक जीवन में दवाईयों का प्रयोग कम कर सकते हैं। अंत में निदेशक डॉ. राजीव कुमार उपाध्याय , संयोजक डॉ. अरूण चौपड़ा, विभागाध्यक्ष प्रमोद कुमार ने जर्मनी की प्रो. गिरलिंडे ए.एस.मिट्ज, कनाडा के वैस्टर्न ऑनटेरियो विश्वविद्यालय के प्रो. रविन्द्र छिब्ब्र, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. गिरधर पाण्डेय, जे.एन.यू., दिल्ली के प्रो. सुनील कटेरिया को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर आनंद कॉलेज के डीन फार्मेसी, प्रो. कश्मीरा गोहिल, बायोटेक विभाग शिक्षक विपिन कुमार, शिवी शर्मा, डॉ. नीता सिंह, ममता साहनी सहित संस्थान के समस्त शिक्षक एवं प्रतिभागी मौजूद रहे।

 

 

 

 

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