दिल्ली एनसीआर में फैला है हसीनाओं का मकडज़ाल

बचके रहना ऐ बाबू साहेब….

अफसरों को फंसा कर गांठती हैं जमाने का उल्लू
नए.नए अफसरों को बनाती हैं अपना शिकार

सेल्फी व साथ फोटो खिंचाकर करती हैं ब्लैकमेल


एनसीआर क्षेत्र में अफसरों के लिए सरकार की मंशा पर खरा उतरने के अलावा भी एक खास कसौटी पर खरा उतरने की चुनौती बनी हुई है। सरकार की मंशा पर खरा उतरने वाले अफसरों के लिए दिल्ली एनसीआर की चकाचोंध से लबरेज हुस्न की मल्लिकाओं से बचकर निकलने वाली कसौटी पर खरा उतरना जरा मुश्किल काम साबित हो रहा है। मुश्किल हो भी क्यूं न क्योंकि यहां फैला है कुछ हसीनाओं का मकड़ जाल। वैसे तो ये हसीनाएं अपने जाल में हर विभाग के अफसरों को फंसाना चाहती हैं। लेकिन पुलिस विभाग के नौजवान अफसर इनके खास टारगेट पर हैं। उसमें भी अफसर अगर स्मार्ट और अविवाहित हो तो इन हसीनाओं का काम जरा आसान हो जाता है। हांलांकि शोहरत की बुलंदियों तक पहुंचने के लिए इन्हें उम्रदराजों से भी परहेज नहीं। हालिया मामला नगर निगम में एक बाबू को हनी ट्रेप में फंसाने का सामने आया और सोशल मीडिया पर ऐसी ही हसीनाओं के तमाम किस्से पढऩे और देखने में आ रहे हैं। ये हसीनाएं अफसर से पहली मुलाकात उसकी पोस्टिंग के बाद फूलों का गुलदस्ता देकर स्वागत के नाम पर करती हैं और फिर किसी न किसी शिकायत के बहाने इनका अफसर से मिलने का दौर शुरु होता है। चंद मुलाकातों में ही ये हसीनाएं खुद को हाईप्रोफाइल बताकर अफसर पर धीरे.धीरे डोरे डालने लगती हैं। इनका प्रयास अपनी मक्खन मार्का चिकनी चुपड़ी बातों से अफसर को जाल में फंसाने का रहता है। अगर अफसर इनकी मक्खन मार्का बातों में फिसला या फिर उसने जरा भी उन्हें ढील देने की चूक की या औरों से ज्यादा तवज्जो देकर उन्हें सुना तो मानों उसके बुरे दिनों की शुरुआत हो गई। इन हसीनाओं का आलम ये है कि फर्राटेदार अंग्रेजी बोलकर ये अफसर को खुद के हाईप्रोफाइल होने का अहसास कराती हैं और फिर अफसर के साथ सेल्फी और फोटो लेकर उसका बखूबी इस्तेमाल भी करती हैं। इन्हीं फोटो के आधार पर ये जमाने भर में उक्त अफसर से अपनी नजदीकियों का ढोल पीट कर उल्लू सीधा करने लग जाती हैं। दावा ऐसा करती हैं कि मानों उनसे ज्यादा अफसर के करीब कोई नहीं। जबकि पर्दे के पीछे की सच्चाई कुछ और ही होती है। जिसे अफसर भलीभांति जानते और समझते हैं। सबसे अहम बात ये है कि इन हसीनाओं की हकीकत जानने के बाद अगर अफसर इनसे दूरियां बनाने की कोशिश भी करता है तो ये उसे बदनाम करने से भी गुरेज नहीं करती। सूत्रों से पता चला है कि हसीनाओं का ये रैकेट बड़े ही सुनयोजित तरीके से काम करता है। अगर किसी अफसर ने एक हसीना को दरकिनार किया तो ये सब एक साथ मिलकर अफसर के खिलाफ झंडा बुलंद करने लगती हैं। यही वजह है कि समझदार पुलिस अफसर महिलाओं की शिकायत सुनने के दौरान अपने दफ्तर में महिला सिपाहियों को तैनात रखने लगे हैं। अगर अफसरों ने ऐसी हसीनाओं की पहचान कर इनपर रोक लगाने की हिम्मत नहीं दिखाई तो इनका फर्जीवाड़ा यूं ही जारी रहेगा और अफसर बदनामी के डर से न सिर्फ इनका शिकार होते रहेंगे। बल्कि उन्हें बदनामी का दंश भी झेलना पड़ सकता है।

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