हरेकृष्ण गोयल,

मांट। हिन्दी के प्रसिद्ध आलोचक प्रो. नामवर सिंह केवल हिन्दी के ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारतीय साहित्य के मजबूत स्तम्भ थे। उन्होंने अपने लेखन से साहित्य को जितना समृद्ध किया उतना ही अपनी वक्तृत्व कला से चमत्कृत। उनका जाना भारतीय साहित्य की अपूरणीय क्षति है।

यह विचार राजकीय महाविद्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में हिन्दी विभागाध्यक्ष डाॅ. राजेश कुमार ने व्यक्त किये। इस अवसर पर महाविद्यालय प्राचार्य डाॅ. मीनाक्षी वाजपेयी एवं प्राध्यापक डाॅ. दीन दयाल, डाॅ. विक्रान्त सिंह, डाॅ. धर्मवीर सिंह, डाॅ. रामवीर सिंह, डाॅ. प्रिया मित्तल आदि तथा छात्र-छात्राओं ने दो मिनट का मौन धारण कर प्रो. नामवर सिंह को विनम्र श्रद्धांजलि दी। 93 वर्षीय प्रो. नामवर सिंह का 19 फरवरी की रात नई दिल्ली स्थित एम्स में निधन हो गया था।






