हरेकृष्ण गोयल

-भांडीरवन में आयोजित हुआ पर्वी मेला
मांट। सोमवती अमावस्या पर सोमवार को भांडीरवन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी,इसके लिए सेवायत कई दिनों से व्यवस्थाओं में जुटे हुए थे।भांडीरवन के बारे में मान्यता है कि यहाँ राधा कृष्ण का विवाह संपन्न हुआ था,माना जाता है कि उक्त विवाह स्वयं ब्रह्मा जी मे सम्पन्न कराया था।यहीं भगवान श्री कृष्ण का विवाह के पश्चात मुकुट भी सिराया गया था। किदवंती के अनुसार भांडीरवन में पवित्र वेणु कूप भी है,जिसका जल आज भी नहीं सूखा है। मान्यता है कि भगवान भरी कृष्ण एक बार गौचारण करते हुए भांडीरवन आये तो कंस ने बछड़ा के रुप में बछासुर नाम के एक राक्षस को भेज दिया,जिसका भगवान ने वध कर दिया।

परन्तु बाद में विद्वान पंडितों ने उन्हें बताया कि उन्होंने बछड़े का वध किया है,इसलिए उन्हें इसका पाप लगेगा,इससे मुक्ति पाने के लिए उन्हें सभी तीर्थों की यात्रा करनी होगी। भगवान ने यहीं बांसुरी से कुआं खोदकर सारे तीर्थो का आह्वान किया,सारे तीर्थ वहां आये और अपने पवित्र जल को वेणु कूप में प्रवाहित किया।मान्यता है कि इस कुआं में आज भी सोमवती अमावस्या के दिन ब्रह्म महूर्त में दूध की धार निकलती है। इस कुएं के जल से स्नान करने से सारी मनोकामना पूर्ण होती हैं,वहीं कुआं के स्नान के बाद एक छोटे से कुंड में एकत्रित हुए उस जल में स्नान करने से निसन्तान स्त्री को संतान प्राप्ति होती है। महिलाएं यहाँ स्नान के बाद पुराने बस्त्र आभूषणों का त्याग कर नूतन बस्त्र धारण करती हैं।सोमवार को घने कोहरे के बाद भी बड़ी तादाद में लोग भांडीरवन पहुंचे,महिलाओं ने सन्तान प्राप्ति की उम्मीद लिए कुआं के पावन जल से स्नान किया।भांडीरवन मन्दिर से सेवायत प्रमोद भारद्वाज ने बताया कि राधा जी मांग से सिंदूर भरते हुए अद्वितीय विग्रह केवल भांडीरवन में मौजूद थे। जिसमें कृष्ण भगवान पंजे के बल खड़े होकर राधारानी की मांग भर रहे हैं।






