हरेकृष्ण गोयल

मांट। राजकीय महाविद्यालय के पुरातन छात्र परिषद् द्वारा मंगलवार को भूतपूर्व छात्र-छात्राओं की बैठक आयोजित की गई, जिसका उद्घाटन प्राचार्य डाॅ. मीनाक्षी वाजपेयी एवं डाॅ. सुरेन्द्र सिंह ने सरस्वती प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया।महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना के पश्चात भूतपूर्व छात्र-छत्राओं ने अपने अनुभव साझा किये। इस महाविद्यालय से बी.ए. उत्तीर्ण जीतेन्द्र कुमार, उमेश शर्मा, देवेन्द्र कुमार आदि ने अपने अनुभव साझाा किये। बी.काॅम. के छात्र रहे उमेश ने एक गीत के माध्यम से गुरुओं के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की तो बी.ए. के भूतपूर्व छात्र जीतेन्द्र कुमार ने एक प्रेरक प्रसंग के माध्यम से जीवन की सार्थकता में गुरुजनों के योगदान का महत्व बताया। बी.ए. के ही भूतपूर्व छात्र देवेन्द्र कुमार ने भी गीत और कविता के माध्यम से महाविद्यालय परिवार में बिताए गए छात्र जीवन की मधुर स्मृतियों को व्यक्त किया। इस अवसर पर अन्य छात्र-छात्राओं ने भी अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने सफल-सार्थक जीवन की प्रेरणा के लिए महाविद्यालय में अनुकूल परिवेश के निर्माण में प्राचार्य एवं शिक्षकों के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर नगीना, निशा, पूजा, सोनू दीक्षित, गौरव बंसल, अभिषेक, बृजवासी, सूर्या राजूत, विजय सिंह, आरती जायस, भावना जायस, शुभम शर्मा आदि पुरातन छात्र-छात्राओं की महत्वपूर्ण उपस्थिति रही।

महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डाॅ. सुरेन्द्र सिंह ने पुरातन छात्र-छात्राओं को संस्थान की रीढ़ बताया तथा उन्हें महाविद्यालय से निरन्तर जोड़े रहने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। अपने सम्बोधन में प्राचार्य डाॅ. मीनाक्षी वाजपेयी ने भूतपूर्व छात्र-छात्राओं को शिक्षण संस्थान का गौरव बताते हुए इस बात पर विशेष बल दिया कि उनमें माता-पिता के अलावा गुरुजनों के भी संस्कार झलकते हैं। भूतपूर्व छात्रों द्वारा काव्यात्मक प्रस्तुतियों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी रचनात्मक अभिव्यक्तियाँ गुरुओं द्वारा प्रदत्त संस्कारों का परिचायक हैं। पुरातन छात्र परिषद् द्वारा भूतपूर्व छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित इस कार्यक्रम को उन्होंने वर्तमान छात्र-छात्राओं के लिए भी प्रेरक और उपयोगी बताया। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन डाॅ. सुमित चन्द्र ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।






