कंगना की मणिकर्णिका फिल्म का देखें रिव्यू
मनोरंजन डेस्क से। पीडीयू समाचार
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श्श्खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थीश्श् सुभद्रा कुमारी चौहान की रानी लक्ष्मी बाई पर लिखी ये कविता बचपन में हमने और आपने खूब पढ़ी और सुनी हैंए कंगना रनौत डेब्यू डायरेक्टर के तौर पर झांसी की रानी लक्ष्मी बाई पर आधारित फिल्म श्मणिकर्णिकाश् लेकर आई हैं। निर्देशक कृष के बीच में फिल्म छोड़ देने के बाद कंगना रनौत ने फिल्म को रीशूट किया हमारे सामने लेकर आई हैंए कंगना ने क्या एक निर्देशक के तौर पर इस फिल्म के साथ न्याय किया है और क्या यह फिल्म रानी लक्ष्मी बाई के साथ न्याय करती है यह सब हम आपको इस रिव्यू में बताने वाले हैं।
इस फिल्म की कहानी विजयेंद्र प्रसाद ने लिखी हैए वो साउथ से हैं शायद इसलिए उत्तर भारत की उन्हें उत्तर भारत के कल्चर की ज्यादा जानकारी नहीं है यही वजह है कि फिल्म में काशीए झांसी और ग्वालियर की जो झलक दिखती है उसमें कहीं भी वहां की खुश्बू नहीं हैए ना वो रंग ना वो संगीत और ना ही वो बोली। इसमें कोई शक नहीं कि फिल्म को बहुत भव्य बनाया गया हैए कंगना जब.जब भी स्क्रीन पर आती हैं रौनक आ जाती हैए लेकिन कंगना की पतली आवाज और उनका दुबला.पतला शरीर और गोरा रंग देखकर आपका मन उन्हें झांसी की रानी लक्ष्मी बाई मानने से इनकार कर देगा। हालांकि कुछ सीन उन्होंने लजवाब तरीके से किए हैं जैसे उनके बेटे और पति के निधन वाले सीन हों या अंग्रेजों के सामने उनका सिर झुकाने से इनकार करने वाले सीन। लेकिन फिर भी जिस इमोशन और जिस जोश की उम्मीद थी उसमें यह फिल्म नाकामयाब रही है।






