हरेकृष्ण गोयल
मांट। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के कस्बा में निष्पयोज घोषित हो चुके बस अड्डे में लघुशंका करने से लोगों को रोकने के लिए ही तीन कर्मचारियों की तैनाती कर रखी है।

कस्बा में तहसील के सामने कई दशक पुराना बस अड्डा है। जो कि करीब दो दशक से बंद पड़ा है। कई वर्ष पूर्व इसके भवन को भी निष्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है। लम्बे अरसे से इसमें किसी सरकारी बस को प्रवेश होते हुए नहीं देखा गया।
कुछ समय पूर्व सुरीर के मूल निवासी और रोडवेज के एक कर्मचारी ने स्वयं को दिव्यांग घोषित करा कर मांट बस अड्डे के प्रभारी के रूप में अपनी नियुक्ति करा ली है। वहीं एक अन्य कर्मचारी भी सविंदा पर रोडवेज ने यहां रखा हुआ है,एक चौकीदार कम सफाई कर्मचारी भी यहां तैनात है।
पूरे दिन यह तीनों कर्मचारी बस अड्डे में सुबह से लेकर शाम तक केवल बस अड्डे में लघुशंका करने वालों को रोकने का काम करते हैं,वहीं कोई निजी गाड़ी उसमे पार्क न हो जाये ये देखते हैं।
यह बात दीगर है कि रात के अंधेरे में वहां क्या हो रहा है इससे इन कर्मचारियों को कोई सरोकार नहीं रहता।कस्बा के ही अनिल गोयल का आरोप है कि इन्हीं कर्मचारियों ने बस अड्डे में बने कार्यालय की चाबी एक फल विक्रेता को दे रखी है जो रात में अपनी दुकान का समान उसमें रखता है।
सोचनीय विषय यह है कि एक तरफ जहां रोडवेज विभाग स्टाफ कम होने का रोना रोता रहता है,ऐसे में केवल लघुशंका करने से लोगों को रोकने को तीन कर्मचारी तैनात किए हुए हैं।






