– कई डीएलड छात्र पिछली बार डायट में ठीक डाक्यूमेंट न होने के कारण प्रवेश से वंचित हुए
-रेंडम क्रास चेकिंग कराना लाजिमी क्यों नहीं समझा चयन समिति ने
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पीडीयू समाचार
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मथुरा। 12460 अध्यापक भर्ती मामले में एसआईटी ने मथुरा की अध्यापक चयन समिति को दोषी मानकर कमेटी के खिलाफ कार्यवाही की संस्तुति की है। सवाल यह उठ रहा है कि जो चयन समिति डीएलएड प्रवेश प्रक्रिया में इतनी सजगता बरतती है कि थोडी सी गडबड मिलने या पर्याप्त डाक्यूमेंट न होने की स्थिति में संबंधित छात्र का प्रवेश रोक दिया जाता है। उस समिति ने अध्यापक भर्ती की बडी कार्यवाही में आंखें बंद कैसे कर लीं। फिर समिति के किसी भी प्रबुद्व सदस्य का यह तक सुझाव नहीं रहा कि डाक्यूमेंटस की रेंडम क्रास चेकिंग करा लें।
पूरी भर्ती प्रक्रिया का दारोमदार चयन समिति पर ही होता है। बीएसए इसका सदस्य होता है। डायट प्रिंसीपल इसके अध्यक्ष होते हैं। हालांकि डायट प्रिंसीपल डा मुकेश अग्रवाल की गिनती ईमानदार अधिकारियों में शुमार है। लेकिन चयन समिति में हुई गलतियों से वे बच नहीं सकते। यही नहीं पूरी कमेटी को दोषी माना गया है। हालांकि डायट प्रिसीपल का कहना है कि ऐसे पता नहीं होता। किन्तु जैसे ही शिकायत मिली , तुरन्त उनहोने शासन को उच्चस्तरीय जांच की संस्तुति की। कार्यवाही को लिखा। फर्जी अध्यापकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। शासन के राजस्व की कोई हानि नहीं हुई। वे कहते हैं कि कुछ ऐसी व्यवस्थाएं होती हैं कि शासन से टाइमफ्रेम होता है। तब बीएसए जो कमेटी के सचिव होते हैं, उनकी रिपोर्ट पर ही विश्वास करना पडता है। दो दिन में सभी चीजों का सत्यापन नही हो सकता। तत्कालीन बीएसए संजीव ने प्रमाणित कर रिपोर्ट उनको दी, उस पर विश्वास कर उन्होने भी हस्ताक्षर कर दिए। अब उनको दोषी माना जा रहा है, यह उनकी खुद समझ में नहीं आ रहा है।
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कमेटी को लग गई थी जंग, नीरसता से हुआ था काम
सूत्रों की मानें तो चयन समिति में सदस्यों को मुददतों से नहीं बदला गया था। वे केवल औपचारिकता निर्वहन कर रहे थे। यही सामने आया कि समिति में एक एक पदेन सदस्य दस दस साल हैं। यदि समिति को समय समय पद रिफ्रेश किया होता, तब शायद यह नौबत नहीं आता। क्यों कि सदस्यो के विचार और सलाह भी कभी कभी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं था। एक दो सदस्यों का तो यहां तक कहना है िकवे तो केवल रबर स्टाम्प है। उनका चयन में क्या रोल। यह तो उनके साथ अन्याय होगा, यदि उनके खिलाफ कार्यवाही हुई तो।






