MATHURA-शहीदों के परिजनों का सरकार के निर्णय के खिलाफ छलक रहा दर्द

– झंडीपुर के शहीद बबलू की पत्नी समेत एक दर्जन परिजनों ने दिया डीएम को ज्ञापन
– 1 फरवरी से आन्दोलन की धमकी दी सरहदों की भेंट चढे सैनिकों की पत्नियों और परिजनों ने
भरत लाल गोयल, चीफ न्यूज एडीटर पीडीयू समाचार


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मथुरा। शहीदों की चिताओं पर लगेंगेे हर बर्ष मेले। वतन पर मरने वालों का यही बाकीं निशां होगा…………………………………..। वर्तमान में सहरद पर शहीद सैनिकों के परिजनों को देखकर ऐसा ही लग रहा है। वे शासन और प्रशासन से न्यायोचित मांग को लेकर जंग करने के मूड मे आ गए हैं।
योगी के नेतृत्व वाली सूबे की सरकार ने हाल में फैसला लिया है कि अप्रेल 2017 के बाद प्रदेश से जो बाॅर्डर पर शहीद हुए हैं, उनके परिजनों को प्रदेश सरकार नौकरी प्रदान करेगी। इस फैसले के खिलाफ जनपद और आसपास के जिलों के शहीद के परिजन लामबंद हो गए हैं। एक दर्जन शहीद सैनिकों के परिवारों ने डीएम को इस बावत ज्ञापन भी सौंपा हैं। उनका दर्द है कि क्या 2017 के बाद जो सैनिक शहीद हुए हैं, वही शहीद हैं। उससे पहले के देश पर शहीद नहीं हुए। छह वर्ष पूर्व कोसीकलां के शहीद हेमराज की पत्नी ने शहीदी दिवस पर सरकार के खिलाफ मूंह खोला और कहा कि सरकार अब अपने वायदे से मुकर रही है। झंडीपुर के शहीद बबलू सिंह के भाई सतीश सिंह और पत्नी रविता देवी ने कहा कि उनके परिवार को न तो नौकरी मिली है , न पार्क की जमीन मिल पाई है। जो घोषणा राशि देने की हुई थी, वह राशि भी नहीं मिल सकी है। सरकार का यह भेदभावपूर्ण वर्ताव बरदाश्त नहीं है। यही नहीं चैमुहां के शहीद कालीचरण, लोका के शहीद रोहताश, दखौला के सतेन्द्र ,मांट के हर्दपुर गांव के शहीद विनोद,गोबर्धन के खूंटिया गांव के पुष्पेन्द्र छाता के गांव लाडपुर के विक्रम सिंह के परिजन निरन्तर न्याय के लिए भटक रहे हैं। किसी को अभी तक जमीन नहीं मिली है तो किसी को जमीन और धनराशि दोनों ही नहीं मिले हैं। न्याय की उम्मीद में वे सरकार की हर चैखट पर दस्तक दे रहे हैं। लेकिन उनकी पीडा सुनने वाला सम्भवत कोई नहीं है। शहीद चंदन की पत्नी सरिता अपनी 18 साल की लडकी को लेकर डीएम कार्यालय पर गिला करने पहुंची, साहब उनकी बेटी अब नौकरी लायक हो गई है। लेकिन कौन सुननेवाला था उनका दर्द। शहीद की पत्नी ने बताया कि उनके पति की शहादत को सरकार स्वीकार नहीं कर रही। सरकार की नीतियों से व्यथित शहीद के परिजनों ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यदि उनके साथ बाजिव न्याय नहीं हुआ तो वे एक फरवरी से आन्दोलन को अंजाम देंगे।

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