MATHURA-केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने हाथी संरक्षण केंद्र को किया अवैध घोषित

-हाथियों के गलत तरीके से देखबाल को लेकर गैर सरकारी संस्था को नोटिस जारी
डॉ देवेन्द्र गोस्वामी
(प्रमुख संपादक)
PDU समाचार
मथुरा।देश के कई राज्यों में एशियाई हाथियों के संरक्षण एवं देखभाल केंद्रों का संचालन कर रहे गैर सरकारी संगठन ‘वाइल्ड लाइफ-एसओएस’ के मथुरा जनपद के चुरमुरा गांव में यमुना नदी के किनारे स्थित ‘हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र’ को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने अवैध घोषित कर दिया है।
प्राधिकरण ने इस संबंध में गैरकानूनी ढंग से हाथियों को अपने कब्जे में रखने की कथित आरोपी संस्था सहित संबंधित विभागों को भी नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है। प्राधिकरण ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्य वन संरक्षक को इस मामले में जांच कर कृत कार्यवाही से अवगत कराने को कहा है।
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के सदस्य-सचिव डीएन सिंह ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 38 एच (1-ए) के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति अथवा संस्था प्राधिकरण से पूर्व अनुमति प्राप्त किए बिना न तो हाथी को अपने कब्जे में रख सकता है और न ही उसका सार्वजनिक प्रदर्शन कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा है कि इसी प्रकार धारा 38 एच (1) के तहत कोई भी व्यक्ति अथवा संस्था पंजीकरण के बिना अपने यहां चिड़ियाघर नहीं स्थापित कर सकता। जबकि उन पर लगाए गए आरोपों के अनुसार यह भी सत्य है कि आरोपी ‘वाइल्ड लाइफ एसओएस’ वर्ष 2010 से हाथी संरक्षण केंद्र का संचालन कर रही है जिसमें लोगों को वहां विजिट करने तथा हाथियों के भोजन आदि के लिए दान के रूप में धनराशि देने का आग्रह किया जाता है।
इसके अलावा यह भी ज्ञात हुआ है कि यह संस्था बाहरी व्यक्तियों से भी डेढ़ हजार रुपए का शुल्क लेकर उन्हें वहां विजिट कराती है। जिसे हाथियों को भोजन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया करार दिया जाता है। इस प्रकार यह केंद्र अवैध रूप से स्थापित किया गया है तथा इसे संचालित नहीं करने दिया जा सकता।
सिंह के नोटिस में बताया है कि वन्यजीव प्रेमी गौरी मुलेखी एवं हरियाणा के वन्यजीव स्काउट एवं गाइड कमिश्नर नरेश कादयान ने इस मामले में शिकायत कर एनजीओ पर विदेशी मुद्रा अधिनियम 2010 के तहत भी कई प्रकार की अनियमितताओं के प्रमाण देते हुए शिकायत की थी। जिन पर कार्यवाही करते हुए यह नोटिस जारी किए गए हैं।
प्राधिकरण के सदस्य सचिव ने उप्र के मुख्य वन्यजीव वार्डन को संबोधित नोटिस की प्रतिलियां इसी विभाग के सचिव, संस्था के सह-संस्थापक कार्तिक सत्यनारायण तथा दोनों शिकायतकर्ताओं गीता मुलेखी एवं नरेश कादयान को भी भेजी हैं।
शिकायतकर्ता ने इस मामले को पुख्ता तरीके से पेश करते हुए संस्था की वेबसाइट पर दिए गए ई-मेल व मोबाइल फोन नंबर आदि तथ्यों का प्रमाण भी दिया है। पूरे प्रकरण में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के सदस्य सचिव के लिए यह सच्चाई बहुत आश्चर्य पैदा करने वाली है कि संस्था के सह-संचालक कार्तिक सत्यनारायण स्वयं सितम्बर’ 2007 से मई’ 2017 तक चिड़ियाघर अथाॅरिटी की तकनीकि समिति के सदस्य रहे हैं।
दूसरी ओर, एनजीओ की प्रतिनिधि अरिणीता शाण्डिल्य ने कहा, ‘सेण्ट्रल ज़ू अथाॅरिटी कानून की जिस धारा के अंतर्गत यह नोटिस जारी किया है, वह उन पर लागू ही नहीं होता। या यूं कहें कि यह संस्था चिड़ियाघर प्राधिकरण के दायरे में ही नहीं आती। यह तो मूल रूप से हाथी रेस्क्यू सेण्टर है जो उत्तर प्रदेश वन विभाग के साथ मिलकर हाथियों का संरक्षण एवं उनकी देखभाल करता है।’ वाइल्डलाइफ एसओएस ने इस मामले में जो पहला जवाब दाखिल किया है उसमें अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को झुठलाने का प्रयास किया है। लेकिन वे अब भी कुछ सवालों के जवाब नहीं दे पाए हैं। जैसे कि यदि वे स्वयं को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के नियमों के दायरे में आने से बाहर बताते हैं तो उन्होंने हरियाणा में स्थापित हाथी संरक्षण केंद्र को वन्यजीव अधिनियम 1972 की धारा 38 (एच) के तहत पंजीकरण क्यों करा रखा है और क्यों वह उसका संचालन नियमानुसार हो रहा है। जबकि मथुरा के हाथी संरक्षण केंद्र के मामले में ऐसा नहीं किया गया है। हाल ही में विगत दिनों आगरा मंडलायुक्त अनिल शर्मा के द्वारा वाइल्डलाइफ एसओएस एलीफेंट अस्पताल का शुभारंभ किया गया जिसमें दर्जनों भर के अधिकारियों की मौजूदगी रही थी।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*