– राजनीतिक गुरु की जन्मस्थली में मनाया पूर्व प्रधानमंत्री का जन्म उत्सव
-वक्ताओं ने अटल जी को सादगी, संस्कार और प्रेरणा की बताया प्रतिमूर्ति

दीनदयाल धाम: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई भारत की आधुनिक राजनीति के संत थे।देश की एकता के लिए वे विरोध की राजनीति को भी दरकिनार करते थे। ऐसे जननायक के जीवन से प्रेरणा लेकर युवाओं को आगे आना चाहिए।
यह विचार मंगलवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म स्थली दीनदयाल धाम स्थित स्मारक परिसर में वक्ताओं ने व्यक्त किए। स्मारक के निदेशक राजेंद्र सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की छाप अटल जी पर थीः गांव- गरीब उनके चिंतन में था। आज सड़कों का गांव तक बिछा जाल और स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क परियोजना भी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की देन थी। राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए उन्होंने विरोध की राजनीति को दरकिनार किया तो राजनीति में रहते हुए उन्होंने उसकी स्वच्छता बनाए रखी।
कृषि विशेषज्ञ डॉ रमेश पाल ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई का जीवन सादगी और संस्कारों से भरा हुआ था। वह सबको साथ लेकर चलने की राजनीति करते थे, देश उनके लिए सर्वोपरि था। भाजपा के वरिष्ठ नेता सालिगराम वाटिया ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेई क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा प्रेरणा दाई रहे और उन्होंने उनको संस्कार भी दिए।
दीनदयाल धाम निवासी राजेंद्र शर्मा ने कहा कि अटल जी दीनदयाल जी के गांव को काफी वरीयता देते थे। हर बार स्मारक इस आने के दौरान वे गांव में जरूर भ्रमण करते थे। इस मौके पर हरिशंकर पाठक, अशोक कुमार शर्मा, श्रवण मिश्र, सुनील मित्तल, तेजपाल सिंह, ब्रजमोहन गौड़, जगमोहन पाठक, ओम प्रकाश आदि ने भी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई से जुड़े संस्मरण सुनाए। इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत स्मारक के निदेशक और अन्य अतिथियों ने अटल बिहारी वाजपेई के चित्र पर दीप जलाकर की और युवाओं से उनके कामों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने को का आह्वान किया। कार्यक्रम में प्रेम चंद पाठक, राजदर्शन पचौरी, अजय कुमार, बलवीर शर्मा, राजकुमार, दिनेश आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।संचालन नरेंद्र सिंघल ने किया।






