हार नहीं मानुंगा, रार नहीं…………………दीनदयालधाम से जुडी हैं स्मृतियां

– नगला चन्द्रभान डूबा शोक और आंसुओं में
भरत लाल गोयल, चीफ एडीटर पीडीयू समाचार
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फरह। भारत के रत्न कर्मठ व्यक्तित्व के अस्वस्थ्यता की खबरें सोशलमीडिया पर तैरने लगीं तो दीनदयालधाम शोकाकुल हो गया। बाद में सोशल मीडिया पर उनके परलोक गमन की खबरें आने लगीं तो समूचे देश के साथ फरह भी आहत हो गया।
भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेई की यादें आज भी दीनदयालधाम से जुडी हैं। वे यादें भी संयोजित हैं, जब उन्होने मथुरा से लोकसभा चुनाव लडा था। वर्तमान में पूर्व प्रधानमंत्री पं दीनदयाल स्मारक समिति के संरक्षक हैं। सालों से वे इस पद को सुशोभित करते आ रहे हैं। उनका सानिध्य और मार्गदर्शन अभी भी चन्द्रभान को आलोकित कर रहा है। उनकी प्रेरणा से दीनदयालधाम वटवृक्ष बनकर समूची दुनियां के नक्शे पर उभरकर आया है। पुराने संघी बताते हैं कि पं दीनदयाल के साथ अटलजी कई कई दिनों तक दिनों नगला चन्द्रभान में ठहरते थे। उनकी खबर से दीनदयालधाम सहमा हुआ है। बीच में उनके बीमार पडने की खबर धाम को मिली तो मेला समिति के पदाधिकारी डा रोशनलाल, अशोक टैंटीवाल उनको देखने दिल्ली भी गए थे। उन्होने पंडितजी के साथ जनसंघ को प्रशस्त ही नहीं किया,वरन मजबूती भी प्रदान की। यह उनकी उपलब्धि अभी भी इतिहासबद्व है। स्मारक समिति के संग्रहालय की दरो-दीवारों पर लगे पं दीनदयालजी के साथ उनके तमाम फोटो दीनदयाल नगरी के प्रति उनके अगाध प्रेम को आज भी बयां कर रहे हैं।

यह उनका प्रेम ही था, जब वे देश के प्रधानमंत्री बने तो सबसे पहले वे इस धरा पर पधारे। उन्होने यहां उधोग केन्द्र का उदघाटन ही नहीं किया,वरन कई केन्द्रीय योजनाआें का मुहूर्त भी यहां से निकाला। ऐसे कर्मठ, बुद्वि के धनी राजनीतिज्ञ को भला कौन सा देशवासी विस्मृत कर सकता है। स्मारक समिति के निदेशक राजेन्द्र कहते हैं कि अटलजी जैसे देश के नेता का अब अभ्युदय सम्भव नहीं है। उन्होने दीनदयालधाम के लिए बहुत कुछ किया जो आज तक किसी ने नहीं किया।

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