MATHURA-शहर बना टापू , देहात के तालाब लबालब,जमालपुर में दलितों की झोपडी में घुसा पानी

– संस्थाओं और सरकारी कार्यालयों के परिसरों में भरा पानी
– आवागमन हो रहा प्रभावित
भरतल लाल गोयल,देवेन्द्र गोस्वामी

पीडीयू समाचार



मथुरा। बरसात के पानी ने दो दिन में खौफनाक मंजर पैदा कर दिया है। मथुरा शहर टापू नजर आ रहा है। जगह जगह जलभराव से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। जहां होली गेट पर पानी भर रहा है तो डीग गेट, भूतेश्वर चौराहा के समीप रेलवे पुल , अमरनाथ बिधाआश्रम के पीछे, सौंखरोड, महोली रोड, पन्ना पोखर, जयगुरूदेव रोड , पुराना बसस्टेण्ड के समीप रेलवे पुल पानी के आगोश में है। इन स्थानों पर वाहनों का निकलना दुश्वार हो गया है। पैदल यात्रियों की शामत आ गई है। गुरूर्पूर्णमा के मददेनजर बाहर से भी काफी संख्या में तीर्थ यात्री और श्रद्वालु मथुरा आ रहे हैं। शहर की कई कालोनियां तो टापू बन गई हैं। उनमें कई कई फुट पानी भर गया है। शहर के बिगडे ड्रेनेज सिस्टम की बरसात के पानी ने पोल खोलकर रख दी है। चारों ओर पानी ही पानी लहरा रहा है। रात के समय तो शहर की सडकों पर चलना किसी मुसीबत को गले लगाने से कम नहीं होगा। जहां बीएसए आफिस के परिसर में पानी भर गया है तो वहीं बाद स्थित जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान में पानी की मात्रा बढती जा रही है। यही हाल रहा तो वहां जाने के रास्ते भी अवरूद्व हो जाएंगे।
वहीं देहात में इससे भी ज्यादा हालात खराब है।

फराह ब्लॉक के गांव जमालपुर, ओल आदि गांवों में पानी लोगों के घरों में घुस गया है। जमालपुर में दलितों की झोपडी में घुसे पानी ने उनकी नींद छीन ली है। गांव का तालाब लबालब हो गया है। उसका पानी पास में बसे दलितों की बस्ती में प्रवेश कर गया है। यही हाल ओल के रास्तों का है। वहां दो दो फीट पानी आम रास्तों पर जमा हो गया है। फरह में ब्लॉक परिसर में दो से तीन फीट तक पानी भर गया हे। पानी के कारण रास्ता ही बंद हो गया है। कोसी, गोबर्धन, मांट, नौहझील, बल्देव आदि क्षेत्रों मे भी बरसात के कारण जगह जगह जलभराव की समस्या पैदा हो गई है। दूसरी ओर बरसात के पानी ने किसानों की चिंता बढा दी है। ज्यादातर किसानों की चरी, लोबिया की फसल पानी में डूब गई है। लोगों को चिंता है कि बरसात का मौसम है। अभी इसी तरह की बरसात होती रही तो उनके पास उनका आशियाना भी नहीं रहेगा। वे खाने पीने तक को तरस जाएंगे। जलभराव से पैदा हो रही समस्या के निदान को प्रशासन का भी ध्यान इस ओर नहीं गया है।

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