बहुचर्चित दलित संजय शीतल जाटव की शादी में बाराती कम, खाकी ज्यादा

निजामपुर गांव में पहली बार चढ़ा दलित समाज का दूल्हा घुड़चढ़ी पर

जिलाप्रशासन की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बारात की रश्में हुई पूरी

कासगंज।हाथरस के संजय जाटव के साथ कासगंज जिले की रहने वाली शीतल की शादी आज धूमधाम के साथ सकुशल संपंन हो गई।निमाजपुर गांव की रहने वाली दूल्हन शीतल ने संजय के साथ सात फेेरे लिये और हिन्दू रीति रिवाज के विवाह संपंन हो गया।पौने छह बजे बारात निजामपुर गांव में पहंचने के बाद घुडचड़ी की रश्में अदा की गई। इस दौरान संजय जाटव की शादी में बाराती, घाराती कम, खाकी ज्यादा दिखाई दी। पूरा निजामपुर गांव पुलिस छावनी में तब्दील रहा। गरीब परिवार से रहने वाले संजय की शादी जनपद में ही नहीं बल्कि देश में बहुचर्चित और एक एतिहासिक बन गई।

आपकों बतादें कि कासगंज जनपद के सदर कोतवाली क्षेत्र के निजामपुर गांव में चार महीने पूर्व दलित संजय की शादी में गांव में घुड़चढ़ी करने  को लेकर एक बाहुल्य और विशेष जाति के लोगों ने विरोध कर दिया था। जिसके बाद संजय जाटव ने इस मामले को पहले जिलाप्रशासन से गुहार लगाई और बाद में सुनवाई न होने पर योगी सरकार से गुहार लगाई कि गांव में वह बारात चढ़ाना चाहता है।यह मामला तीन माह तक प्रदेश में ही नहीं देश में चर्चाओ का विषय बन गया।इसी बीच जिलाप्रशासन ने लडकी नाबालिग बताकर शादी को तीन माह के टाल दिया और दोनों जाति के मध्य बारात चढ़ाने के लिए फैसला कर दिया और मैप तैयार कर दिया कि किस तरह से गांव बारात चढ़ाई जायेगी।

बेसबरी से था इंतजार संजय को

आज वह दिन आ गया जिसका हाथरस के संजय जाटव को बीते चार माह से बेसबरी से इंतजार था,क्योंकि हर दूल्हा चाहता है कि उसकी शादी शान और शौकत के साथ हो, लेकिन इस निजामपुर गांव में आजादी के बाद से आज तक दलित की बारात नहीं चढ़ी थी।आज रविवार की दोपहर निर्धारित समय तीन बजे से सात बजे तक का दिया गया था, लेकिन संजय जाटव की बारात गांव में पौने छह बजे के तकरीबन पहंुची थी, दूल्हे ने जिलाप्रशासन द्वारा निर्धारित दिए गए समय के अनुसार घुड़चढ़ी को बंद करा दिया। इस दौरान गाजे बाजे के साथ संजय जाटव घुड़-चढी पर चढ़कर दूल्हन शीतल के घर पहंुचा।जहां शादी की औपचारिकताए पूरी की गई।

एतिहासिक बनी संजय जाटव की शादी

बहुचर्चित हाथरस के संजय जाटव की शादी जनपद में ही नहीं बल्कि देश भर में एक एतिहासिक शादी बन गई। इस शादी में बाराती, घाराती तो कम, लेकिन खाकी ही खाकी दिखाई दी,क्योंकि इस शादी में पुलिस को संदेह था कि यदि संजय जाटव ने घुड़चढ़ी की कोई बड़ा विवाद हो सकता था। इसके लिए जिलाप्रशासन ने पूर्व में ही सारे इंतजामात पूरे कर लिये थे।

शादी के दौरान इन्होंने सभाली कमान

जिलाधिकारी आरपी सिंह ने बारात को सकुशल रश्में अदा कराने के लिए पूर्व से ही तैयारियां पूरी कर ली थी, उन्होंने एक एएसपी, एक सीओ, दो इंस्पेक्टर 12 एसओ, 12 एसआई, 70 कांस्टेबिल,दस महिला कांस्टेबिल के अलावा एक प्लाटून पीएसी को तैनात किया। जिससे बारात चढ़त के कोई परिंदा पर नहीं मार सके।इस दौरान पूरा गांव छावनी में तब्दील रहा, तो वहीं एक विशेष जाति के लोग दहशत में रहे।

आजादी के बाद से आज तक नहीं दलित की बारात

गांव निजामपुर के दलित समाज के रमेश, चोबसिंह की माने तो पूरे गांव में ठाकुर बाहुल्य पूरा गांव है,जबकि दलित समाज के मात्र पांच घर है। इस गांव में आजादी के बाद से आज तक कोई दलित की बारात नहीं चढ़ने दी है।आज पहली बार संजय जाटव की बारात निकाली गई है। इससे वह खासे खुश है।

गांव में रहा दहशत का माहौल

15 जुलाई दिन रविवार आज संजय जाटव की शादी को लेकर पूरा निजामपुर गांव सर्वण समाज के लोग दशहत में रहे। बताया जा रहा है कि बुजुर्गो ने अपने अपने जवान बेटो को गांव से बाहर भेज दिया था, कि गांव में कोई बवाल न हो जाये और उनके बेटे न फस जाये।

परिजनों से ज्यादा खर्चा हुआ प्रशासन का

इस शादी के खर्चा का अनुमान लगाया जाये तो शीतल और संजय के परिजनों की शादी की लागात से जिलाप्रशासन का ज्यादा खर्चा हुआ है।आपकों बतादें कि शीतल और संजय का परिवार गरीब है।इस पूरी शादी में दोनों परिवारों के खर्च पर गौर किया जाये, तो जिलाप्रशासन का खर्चा चार गुना अधिक हुआ है,क्योंकि बीते दो दिनों से भारी संख्या में पुलिस प्रशासन लगा हुआ है।

सात फेरों के बाद प्रशासन ने ली राहत

कासगंज जनपद का निजामपुर गांव कई महीनों से जिस विवाह को इंतजार कर रहा था। आज वो रविवार को शीतल और संजय के साथ फेरों के मंगल की घंडी समाप्त हो गई।दोनों को वैदिक मंत्रौच्चारण द्वारा पंडित ने शादी की रस्में अदा कराई।इस दौरान पूरा निजामपुर गांव पुलिस छावनी में तब्दील रहा और जिलाप्रशासन बारात को सकुशल विदा कराकर राहत की सांस ली

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*