भरत लाल गोयल, चीफ एडीटर पीडीयू समाचार
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इस बार जॉब अपार्चुनिटी के घटते अवसरों के कारण डीएलएड करने वालों की संख्या एक तिहाई रह गई है। यही हाल रहा तो आगामी वर्ष में इंजीनियरिंग कालेजों की तरह इस प्रशिक्षण की बहुत कालेजों पर भी ताला लटक जाएगा।

इस साल पिछले साल की अपेक्षा साढे तीन लाख स्टूडेंटस ने डीएलएड के लिए रजिस्ट्रेशन कराए थे, जो पिछले साल के मुकाबले आधे थे। लेकिन आधे स्टूडेंटस भी कालेज नहीं पहुंचे। यानी एडमिशन औसतन रूप से एक तिहाई ने ही प्रथम चरण की काउंसिलिंग में लिया है। दूसरी काउंसिलिंग 12 जुलाई से प्रारम्भ होगी। उसमें कितने छात्र डीएलएड में प्रवेश लेंगे, यह अभी समय के गर्त में है। लेकिन अचानक यह अरूचि क्यों स्टूडेंटस में पैदा हुई, यह समझ से परे हो गया है। माना जा रहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया में देरी और परीक्षा पैटर्न इस रूझान को कम कर रहा है। इसके अलावा मध्यम छात्र महंगी फीस की वजह से भी इस कोर्स से तौबा कर रहा है।
इस बार हाल यह है कि जहां पिछली बार नब्बे फीसदी सीटें फुल हो गई थीं। वहीं इस बार कही ंकहीं दस फीसदी सीटें भरने के भी लाले पड गए हैं। बता दें कि मथुरा जनपद में भी छह हजार सीटें हैं।






